Friday, January 16, 2026
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लोकसभा में नए ग्रामीण रोजगार विधेयक पर हंगामा, विपक्ष ने बताया मनरेगा को कमजोर करने की साजिश

संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (VB-जी राम जी) विधेयक, 2025 पेश किया। विधेयक के पेश होते ही सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्षी दलों ने इसे मनरेगा जैसे कानूनी रोजगार अधिकार को कमजोर करने वाला कदम बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने विधेयक पर तीखा हमला करते हुए कहा कि इससे ग्रामीण रोजगार का कानूनी अधिकार कमजोर होगा और केंद्र सरकार का अनावश्यक नियंत्रण बढ़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मनरेगा को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

महात्मा गांधी के नाम पर विवाद

विपक्षी सांसदों ने विधेयक से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने को उनका अपमान करार दिया। विपक्ष की मांग थी कि या तो विधेयक को वापस लिया जाए या फिर इसे संसदीय स्थायी समिति के पास भेजा जाए।

हालांकि, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “महात्मा गांधी हमारे दिलों में बसते हैं। उनका और पंडित दीनदयाल उपाध्याय का संकल्प था कि समाज के सबसे अंतिम व्यक्ति का कल्याण पहले हो।”

बिल पास होने के बाद शिवराज का बयान

विधेयक पारित होने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार ने यूपीए शासन की तुलना में मनरेगा पर चार गुना अधिक खर्च किया है।
उन्होंने कहा, “अब 100 दिन नहीं, बल्कि 125 दिन रोजगार की गारंटी दी जाएगी। इसके लिए 1 लाख 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। यह विधेयक गरीब के सम्मान और गांधीजी के सपनों को साकार करेगा।”

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “पहले जवाहर रोजगार योजना थी, कांग्रेस ने ही उसका नाम बदला था। क्या तब नेहरू का अपमान हो गया था? यह नया बिल गांवों के समग्र विकास का रास्ता खोलेगा।”

उन्होंने शरद पवार के पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि कृषि कार्यों में मजदूरों की कमी की समस्या को इस योजना से दूर किया गया है और यह गांधीजी की भावना के अनुरूप ‘रामराज्य’ की दिशा में कदम है।

प्रियंका गांधी का तीखा विरोध

प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि यह विधेयक राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि “केंद्र का अनुदान 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे राज्यों की मुश्किलें बढ़ेंगी। यह विधेयक किसी की निजी महत्वाकांक्षा, सनक या पूर्वाग्रह के आधार पर नहीं लाया जाना चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि बाहर से देखने में भले ही यह केवल मनरेगा का नाम बदलना लगे, लेकिन आशंका है कि सरकार भविष्य में इस योजना को पूरी तरह समाप्त कर सकती है।

शशि थरूर समेत कई नेताओं का विरोध

कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल, शशि थरूर, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले सहित कई विपक्षी नेताओं ने विधेयक को संसदीय समिति को भेजने की मांग की।

इस दौरान शशि थरूर ने तंज कसते हुए कहा,

“ओ दीवानो, राम का नाम बदनाम मत करो।”

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