नोएडा: उत्तर प्रदेश सरकार की “Zero Tolerance” नीति को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन नोएडा की ज़मीनी हकीकत इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। यहां मामला अब सिर्फ फर्जी टेंडर या कमीशन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संगठित भ्रष्टाचार, भूमाफिया, अवैध कॉलोनियां और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) में कथित घोटालों तक जा पहुंचा है।
प्राधिकरण के भीतर “सिस्टम” या “सिंडिकेट”?
सूत्रों और शिकायतों के मुताबिक नोएडा प्राधिकरण के भीतर एक ऐसा नेटवर्क सक्रिय बताया जा रहा है, जिसमें कुछ अधिकारी, ठेकेदार और बिचौलिये एक-दूसरे के लिए ढाल बने हुए हैं। आरोप है कि करोड़ों रुपये के विकास कार्य कागज़ों और बिलों में पूरे दिखाए गए, जबकि ज़मीन पर उनका नामोनिशान तक नहीं।
सड़कें, ड्रेनेज, पार्क और सौंदर्यीकरण—हर मद में भुगतान तो हो गया, लेकिन हकीकत या तो अधूरी है या पूरी तरह गायब।
फर्जी कोटेशन, फर्जी बिल और दोबारा टेंडर का खेल
गंभीर आरोप हैं कि—
टेंडर प्रक्रिया में फर्जी कोटेशन लगाए गए
फर्जी बिलों के ज़रिये भुगतान कराया गया
जिन मामलों पर सवाल उठे, उन्हें बिना ठोस जांच के दोबारा हरी झंडी दे दी गई
सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसके दबाव में फैसले बदले गए और जांच अधूरी क्यों छोड़ी गई?
कमीशन मांगने का कथित वीडियो, फिर भी सन्नाटा
सूत्रों के अनुसार टेंडर में कमीशन मांगने का कथित वीडियो भी सामने आया, लेकिन न एफआईआर, न निलंबन और न ही विभागीय जांच।
क्या अब सबूत भी कार्रवाई के लिए काफी नहीं हैं?
अवैध कॉलोनियां और भूमाफिया से सांठगांठ के आरोप
एक पत्र के हवाले से सामने आए आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। पत्र में आरोप है कि अधिकारी गौरव बंसल ने—
कॉलोनाइजरों और भूमाफिया तत्वों से सांठगांठ कर
प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध कॉलोनियां बसाने में मदद की
और इसके बदले कथित रूप से अवैध लाभ लिया
Solid Waste Management या अवैध कमाई का जरिया?
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर अवैध कमाई और प्राधिकरण को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप भी सामने आए हैं।
सबसे चौंकाने वाला आरोप—
सेक्टर-145 स्थित डंपिंग ग्राउंड में रात के समय कचरे की अवैध बिक्री, जिससे हर महीने लाखों रुपये की अवैध कमाई का दावा किया गया है।
सवाल यह है कि—
क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं?
या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?
पुराना इतिहास, नए सवाल
पत्र में यह भी दावा किया गया है कि वर्ष 2022 में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में तैनाती के दौरान भूखंड आवंटन में अनियमितताओं के आरोपों पर गौरव बंसल को निलंबित किया गया था।
इसके बावजूद वर्तमान तैनाती में भी शिकायतें जारी हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नदारद।

विधायक मदन भैया की मुख्यमंत्री से सीधी मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक मदन भैया ने मुख्यमंत्री से—
1.स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच
2.जांच अवधि में संबंधित अधिकारी का तबादला
3.नामी-बेनामी संपत्तियों की गहन जांच
की मांग की है।
हलचल बहुत, जवाब शून्य
मीडिया रिपोर्ट्स और शिकायतों के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तो है, लेकिन—
नोएडा प्राधिकरण या आरोपित अधिकारी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया।
सबसे बड़ा सवाल: कानून सबके लिए बराबर है?
जहां अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाने में देर नहीं होती, वहीं—
अवैध कॉलोनियां
कचरा माफिया
फर्जी दस्तावेज
और करोड़ों की कथित अवैध कमाई
पर कार्रवाई क्यों नहीं?
यह मामला अब केवल भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि प्रशासनिक संरक्षण, राजनीतिक रसूख और जवाबदेही के संकट का प्रतीक बनता जा रहा है।
अब सवाल बिल्कुल साफ है—
Zero Tolerance या Zero Action?
क्या यह रिपोर्ट भी फाइलों में दफन हो जाएगी,
या फिर नोएडा में सचमुच कोई बड़ा एक्शन देखने को मिलेगा?














