जबलपुर में आयोजित वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में शामिल होने पहुँचे जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने फिल्म अभिनेता शाहरुख खान को लेकर बेहद कठोर रुख अपनाया। मंच से उन्होंने शाहरुख खान के पूर्ण बहिष्कार की खुली अपील करते हुए सनातन समाज से भी ऐसा ही करने का आह्वान किया।
स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने सवाल उठाते हुए कहा,
“शाहरुख खान कब देश के समर्थक रहे हैं?”
उन्होंने अभिनेता की पत्नी के एक पुराने बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि “देश में घुटन” जैसे शब्दों का प्रयोग करना न केवल अनुचित है, बल्कि राष्ट्र की छवि को आहत करने वाला भी है।
उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि शाहरुख खान बांग्लादेश के खिलाड़ियों को खेल में आमंत्रित करते हैं और ऐसे व्यक्ति से देशभक्ति की अपेक्षा करना स्वयं में एक भूल है। स्वामी रामभद्राचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से शाहरुख खान का बहिष्कार कर दिया है और सनातनियों को भी यही मार्ग अपनाना चाहिए।
राहुल गांधी की भगवान श्रीराम से तुलना पर कड़ा ऐतराज
कार्यक्रम के दौरान स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने कांग्रेस नेता नाना पटोले द्वारा राहुल गांधी की तुलना भगवान श्रीराम से किए जाने पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा,
“अमृत की तुलना गटर से नहीं की जा सकती।”
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बयानबाजी और प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है।
रामायण को राष्ट्रग्रंथ घोषित करने की मांग दोहराई
स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने मंच से एक बार फिर रामचरितमानस को राष्ट्रग्रंथ घोषित करने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि इस विषय में वे पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह कर चुके हैं और उन्हें पूर्ण विश्वास है कि यह संकल्प अवश्य पूरा होगा।
उन्होंने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यावरण मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से भी अपील की कि वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस की सफलता तभी मानी जाएगी, जब संसद में रामचरितमानस को राष्ट्रग्रंथ का दर्जा मिलेगा।
राष्ट्रगान पर व्याख्या, ‘अधिनायक’ शब्द पर आपत्ति
अपने वक्तव्य में स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने भारत के राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को लेकर भी अपनी व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2007 में वाचस्पति पुरस्कार प्राप्त करने के दौरान, विज्ञान भवन में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के समक्ष उन्होंने इस विषय पर अपने विचार रखे थे।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान रवींद्रनाथ टैगोर की रचना है, लेकिन ‘अधिनायक’ शब्द को लेकर उन्होंने तब भी आपत्ति दर्ज कराई थी।
‘राष्ट्रगान भगवान श्रीराम के गुणगान का प्रतीक’
स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए कहा कि राष्ट्रगान वास्तव में भगवान श्रीराम के गुणगान का प्रतीक है। उनके अनुसार,
“जन-गण-मन के अधिनायक स्वयं भगवान राम हैं, वही भारत के भाग्य विधाता हैं।”
उन्होंने ‘जय हे’ के सात बार उच्चारण को सातों सागरों और सातों लोकों में विजय का प्रतीक बताया।
जबलपुर से दिए गए स्वामी रामभद्राचार्य महाराज के ये सभी बयान अब देशभर में चर्चा और बहस का विषय बने हुए हैं।














