अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में की गई सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। यह घटना भले ही लैटिन अमेरिका में घटी हो, लेकिन इसके झटके दुनिया के कई हिस्सों में महसूस किए जा रहे हैं।
पाकिस्तान में इस घटना को लेकर खास तौर पर बेचैनी देखी जा रही है। इसकी वजह सिर्फ कूटनीति या राजनीति नहीं, बल्कि कुछ गहरे और रणनीतिक कारण हैं। आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं—
1. चीनी हथियारों पर पाकिस्तान की भारी निर्भरता
वेनेजुएला की सेना के पास बड़ी मात्रा में चीनी हथियार और सैन्य सिस्टम मौजूद थे। इसके बावजूद, अमेरिकी कार्रवाई के समय वेनेजुएला कोई प्रभावी सैन्य प्रतिरोध नहीं कर सका।
यही बात पाकिस्तान की शहबाज़ सरकार और सैन्य नेतृत्व को परेशान कर रही है, क्योंकि पाकिस्तान के कुल हथियारों का करीब 82% हिस्सा चीन से आयातित है।
पाकिस्तान की वायुसेना, नौसेना और थलसेना में इस्तेमाल होने वाले कई अहम प्लेटफॉर्म—फाइटर जेट, ड्रोन, मिसाइल सिस्टम और एयर डिफेंस—चीनी मूल के हैं। वेनेजुएला की स्थिति देखकर पाकिस्तान को यह चिंता सताने लगी है कि किसी बड़े सैन्य टकराव की स्थिति में उसकी तैयारी और हथियारों की प्रभावशीलता कितनी कारगर साबित होगी।
2. सत्ता परिवर्तन और तख्तापलट का डर
वेनेजुएला में राष्ट्रपति मादुरो को लंबे समय से जनता का समर्थन हासिल नहीं था। महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली ने सरकार को जनता से पूरी तरह काट दिया था। यही वजह रही कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद वहां सत्ता परिवर्तन अपेक्षाकृत आसान हो गया।
पाकिस्तान में भी हालात कुछ हद तक मिलते-जुलते नजर आते हैं। देश इस समय गंभीर आर्थिक संकट, रिकॉर्ड महंगाई, राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ते जन-असंतोष से जूझ रहा है। यह स्थिति न सिर्फ सरकार, बल्कि सेना के लिए भी चुनौती बन सकती है।
मई 2025 में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद में बताया था कि देश में लगभग 2.2 करोड़ लोग भीख मांगने में शामिल हैं, जिससे सालाना करीब 42 अरब रुपये की अर्थव्यवस्था बन चुकी है।
वहीं यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में 1.25 करोड़ से अधिक बच्चे, यानी कुल बाल आबादी का करीब 16%, बाल मजदूरी में फंसा हुआ है।
वेनेजुएला की तरह पाकिस्तान में भी यह डर है कि अगर जनता का समर्थन कमजोर हुआ, तो बाहरी दबाव के सामने पूरा सिस्टम असहाय साबित हो सकता है।
3. ईरान फैक्टर और पाकिस्तान पर उसका संभावित असर
ईरान पाकिस्तान का पड़ोसी देश है और फिलहाल वह भी अमेरिका और इजराइल के निशाने पर माना जा रहा है।अगर ईरान पर कोई बड़ा सैन्य हमला होता है, तो उसका सीधा और गहरा असर पाकिस्तान पर पड़ेगा।
पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा पहले से ही संवेदनशील है। ईरान में संकट बढ़ने की स्थिति में शरणार्थी समस्या, सीमा सुरक्षा, आतंकी गतिविधियां और आंतरिक अस्थिरता जैसे खतरे पाकिस्तान के सामने खड़े हो सकते हैं।
इसीलिए, भले ही कार्रवाई वेनेजुएला में हुई हो, लेकिन उसकी गूंज पाकिस्तान में साफ सुनाई दे रही है।














