Thursday, March 5, 2026
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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस का अचानक इस्तीफा, चुनाव से पहले सियासत गरमाई; आरएन रवि बने अंतरिम गवर्नर

कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया। गुरुवार को दिल्ली दौरे पर पहुंचे बोस ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुए इस घटनाक्रम को सियासी दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे राज्य की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं।

सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि को फिलहाल पश्चिम बंगाल का अंतरिम राज्यपाल नियुक्त किया गया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी जोर पकड़ रही है।

करीब साढ़े तीन साल तक रहे राज्यपाल
सीवी आनंद बोस को 23 नवंबर 2022 को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। उन्होंने लगभग तीन साल पांच महीने तक इस पद पर रहते हुए कई अहम मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखी। अपने कार्यकाल के दौरान वे राज्य की ममता बनर्जी सरकार की कई नीतियों की आलोचना करते रहे, जिसके कारण राजभवन और राज्य सरकार के बीच कई बार टकराव की स्थिति भी बनी।

इस्तीफे के बाद बोस ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा कि उन्होंने राज्यपाल के कार्यालय में लंबा समय बिताया और यह उनके लिए महत्वपूर्ण अनुभव रहा। हालांकि, उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे की विस्तृत वजहों का खुलासा नहीं किया।

ममता बनर्जी ने जताई हैरानी
राज्यपाल के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें इस खबर से काफी हैरानी और दुख हुआ है। उन्होंने कहा कि अभी तक उन्हें इस फैसले के पीछे की वास्तविक वजहों की जानकारी नहीं है।

ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि अगर विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र की ओर से किसी तरह का राजनीतिक दबाव बनाया गया हो तो यह चौंकाने वाली बात नहीं होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को ऐसे फैसलों में राज्यों से सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि एकतरफा निर्णय भारत के संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करते हैं।

आरएन रवि को मिला अंतरिम जिम्मा
इस्तीफे के बाद तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि को पश्चिम बंगाल का अंतरिम गवर्नर बनाया गया है। रवि पहले भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी रह चुके हैं और उन्होंने केंद्रीय जांच एजेंसियों सीबीआई और इंटेलिजेंस ब्यूरो में भी काम किया है।

तमिलनाडु में उनके और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बीच कई मुद्दों को लेकर टकराव भी सामने आ चुका है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले एक पूर्व पुलिस अधिकारी को अंतरिम राज्यपाल बनाना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

लद्दाख के उपराज्यपाल ने भी दिया इस्तीफा
इसी बीच लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर कविंद्र गुप्ता ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका कार्यकाल जुलाई 2025 में शुरू हुआ था और वे इस केंद्र शासित प्रदेश के तीसरे उपराज्यपाल थे।

उनके कार्यकाल के दौरान लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस जैसे संगठनों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए। इन संगठनों की प्रमुख मांगों में लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा और स्थानीय लोगों के लिए विशेष रोजगार कोटा शामिल रहे हैं।

राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्यपाल का इस्तीफा और अंतरिम नियुक्ति ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को तेज कर दिया है। विपक्ष और सत्तारूढ़ दल दोनों ही इस घटनाक्रम को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है।

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