ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) ने आगामी वित्त वर्ष 2026-27 में ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर-कासना क्षेत्रों में अपने औद्योगिक व आवासीय सेक्टरों के विस्तृत नवीनीकरण और बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए कुल 243 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा है। इसमें साइट-सी के आवासीय सेक्टरों में गंगाजल आपूर्ति के लिए विशेष रूप से 5 करोड़ रुपए अलग से रखे गए हैं।
पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ
गौतमबुद्धनगर जिले के सूरजपुर-कासना क्षेत्र में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम (जो अब प्राधिकरण बन चुका है) की उपस्थिति ग्रेटर नोएडा के विकास से कई वर्ष पहले से थी। यहीं यूपीसीडा ने डीसीएम-टोयोटा, एस्कॉर्ट-यामाहा, शीला फोम, स्टैलियन शॉकर, डेंसो जैसी बड़े उद्योगों को स्थापित कराने में भूमिका निभाई — वे समय थे जब नोएडा में बड़ी औद्योगिक इकाइयाँ कम थीं और छोटे उद्योग अधिक थे।
प्राधिकरण बनने के बाद यूपीसीडा की कार्यशैली में बदलाव आया है और वर्तमान में अधिकारी औद्योगिक और आवासीय सेक्टरों के बुनियादी ढाँचे व सौन्दर्यीकरण पर खासा जोर दे रहे हैं। पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी मयूर माहेश्वरी और वर्तमान मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरण आनंद के नेतृत्व में यह बदलाव तेज हुआ है।
क्या किया जाएगा — प्रमुख कार्यों का सार
यूपीसीडा के क्षेत्रीय कार्यालय के प्रस्ताव के अनुसार इस धनराशि से निम्नलिखित प्रमुख निर्माण व सुधार कार्य कराए जाएंगे:
सड़कों का स्तरोन्नयन एवं नए लेन-निर्माण।
नालियों और ड्रेनेज सिस्टम का पुनरुद्धार।
पार्कों और हरित क्षेत्रों का सौन्दर्यीकरण।
पेयजल आपूर्ति के लिए ओवरहेड टैंक और पम्पिंग/पाइपलाइन व्यवस्था।
निर्यात प्रोत्साहन औद्योगिक पार्क (EPIP) में श्रमिकों के रहने हेतु आवासीय भवन।
कौशल विकास केन्द्र व महिला श्रमिकों के बच्चों के लिए क्रेच।
कमांड-कंट्रोल सेंटर व अपातकालीन प्रतिक्रिया सुविधाएँ।
अग्नि-शमन के लिए भूमिगत जलाशय।
सामुदायिक भवन और स्थानीय स्तर पर सेवा-सुविधाओं का विकास।
क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि साइट-सी आवासीयों में गंगाजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 5 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे तथा इस पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के साथ बैठक-व्यवस्था शुरू कर दी गई है।
अपेक्षित प्रभाव — स्थानीय अर्थव्यवस्था और निवासियों के लिए क्या बदलेगा
इन विकास कार्यों के पूरा होने से निम्नलिखित सकारात्मक प्रभावों की उम्मीद की जा सकती है (विश्लेषण):
बेहतर सड़क-नालाबंदी व पेयजल व्यवस्था से औद्योगिक संचालन में बाधाएँ कम होंगी और आपूर्ति-श्रृंखला सुगम होगी।
श्रमिकों के आवास व क्रेच जैसी सुविधाएँ मिलने से औद्योगिक क्षेत्र में कार्यबल का स्थायीत्व व उत्पादकता बढ़ सकती है।
कौशल विकास केंद्र स्थानीय युवा व मजदूरों को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण देगा, जिससे स्थानीय रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे।
पार्क व सामुदायिक भवनों के विकास से आवासीय क्षेत्रों की जीवन गुणवत्ता सुधरेगी और संपत्ति-मूल्य पर सकारात्मक असर पड़ने की संभावनाएँ होंगी।
गंगाजल आपूर्ति से पानी की गुणवत्ता व स्थिरता पर लाभ होगा; विशेषकर बच्चों व बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव संभावित है।
क्रियान्वयन और पारदर्शिता — क्या देखने की जरूरत होगी
योजना प्रस्तावित है और इसे फाइनल मंजूरी, टेंडर प्रक्रियाएँ, बजट जारी होना और ठेकेदारों के काम के गुणवत्ता-नियंत्रण से गुजरना है। निम्न बिंदुओं पर निगरानी उपयोगी होगी:
परियोजनाओं की समय-सीमाएँ (माइलस्टोन) और हर चरण की सार्वजनिक रिपोर्टिंग।
टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्थानीय ठेकेदारों को अवसर।
पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का आकलन, खासकर ड्रेनेज व पेयजल परियोजनाओं के लिए।
लाभार्थी कम्युनिटी (निवासी, श्रमिक) का सुझाव व शिकायत निवारण तंत्र।
निष्कर्ष — नए दौर की तैयारी
यूपीसीडा द्वारा ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर-कासना और समकक्ष औद्योगिक/आवासीय सेक्टरों के लिए प्रस्तावित 243 करोड़ रुपए का पैकेज सिर्फ भौतिक सुधार नहीं है — यह उन क्षेत्रों को एक नई पहचान देने और औद्योगिक-आधारित विकास को टिकाऊ बनाने का एक कदम माना जा सकता है। यदि योजनाएँ समय पर और पारदर्शी तरीके से लागू हुईं, तो यह निवेश क्षेत्रीय विकास, रोज़गार व रहने-योग्यता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।














