उत्तर प्रदेश की राजनीति में चरखारी से बीजेपी विधायक बृजभूषण राजपूत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का रास्ता रोकने और कथित तौर पर उन्हें बंधक बनाए जाने के आरोप के बाद भारतीय जनता पार्टी ने विधायक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पार्टी ने उनसे एक हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। नोटिस के बाद अब विधायक के पिता और पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत की सफाई सामने आई है, जिसमें उन्होंने बेटे की ओर से माफी भी मांगी है।
दरअसल, कुछ दिन पहले बृजभूषण राजपूत ने 100 से अधिक ग्राम प्रधानों के साथ मिलकर मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला रोक दिया था। विधायक का कहना था कि क्षेत्र में खराब सड़कें और पेयजल संकट गंभीर समस्या हैं और सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही। घटना के बाद विवाद तब और बढ़ गया, जब विधायक का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने कहा कि “यह तो मंत्री थे, ज़रूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री का काफिला भी रोक देंगे।”
पिता ने संभाला मोर्चा, बयान पर लिया यू-टर्न
बीजेपी की ओर से नोटिस मिलने के बाद विधायक के पिता गंगाचरण राजपूत सामने आए और बेटे के बयान पर सफाई दी। उन्होंने कहा, “कभी-कभी आदमी कुछ कहना चाहता है, लेकिन निकल कुछ और जाता है। इस बात के लिए हम माफी मांगते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी के संविधान में अनुशासन सर्वोपरि है और अनुशासनहीनता पर बड़े-बड़े नेताओं को इस्तीफा तक देना पड़ा है। अपराध छोटा हो या बड़ा, सजा सबको मिलती है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि मंत्री से भी कुछ भूल हुई है और पार्टी के नियमों का उल्लंघन हुआ है।
कार्रवाई का डर और सियासी संदेश
गंगाचरण राजपूत ने बृजभूषण के पार्टी छोड़ने की अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनका बेटा बीजेपी के लिए जीता है और बीजेपी में ही रहेगा। बुंदेली कहावत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बृजभूषण ने गलती की है और “मूड धर के पांव पड़ेगा” यानी सिर झुकाकर माफी मांगेगा। उनके बयान से साफ झलकता है कि नोटिस के बाद परिवार को पार्टी की कार्रवाई का डर सता रहा है।
अब विधायक का रुख क्या होगा?
नोटिस जारी होने के बाद अब तक विधायक बृजभूषण राजपूत की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में सवाल यही है कि क्या वे भी अपने पिता की तरह माफी मांगकर मामला शांत करेंगे या फिर अपने रुख पर अड़े रहेंगे। राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि पिता की माफी के बाद विधायक भी जल्द ही तेवर नरम कर सकते हैं।
यह मामला अब सिर्फ मंत्री का रास्ता रोकने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बीजेपी के भीतर अनुशासन और संगठनात्मक सख्ती की परीक्षा बन गया है। अब सबकी नजर पार्टी के अगले कदम और विधायक की प्रतिक्रिया पर टिकी है।














