उत्तर प्रदेश सरकार की ग्राम्य विकास राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने मंगलवार (23 दिसंबर) को विधानसभा में बताया कि राज्य में मनरेगा मजदूरों की प्रतिदिन मजदूरी 252 रुपये निर्धारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मजदूरी दर और कार्य दिवसों की सीमा तय करने का अधिकार भारत सरकार के पास है, इसलिए राज्य सरकार इसमें वृद्धि का निर्णय नहीं ले सकती।
विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान समाजवादी पार्टी के सदस्य त्रिभुवन दत्त द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने यह जानकारी दी।
महंगाई पर सवाल, केंद्र के अधिकार क्षेत्र का हवाला
बढ़ती महंगाई को देखते हुए मनरेगा मजदूरी 700 रुपये प्रतिदिन किए जाने और सालाना कार्य दिवस 300 दिन करने की मांग पर राज्यमंत्री ने कहा कि मजदूरी दर और अधिकतम रोजगार दिवस का निर्धारण केंद्र सरकार करती है। ऐसे में इस विषय पर राज्य सरकार से किसी निर्णय की अपेक्षा उचित नहीं है।
भुगतान में देरी पर विपक्ष का आरोप
पूरक प्रश्न के दौरान सपा सदस्य अनिल प्रधान ने कहा कि मनरेगा योजना कमजोर वर्गों को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने योजना के नाम और वित्तीय व्यवस्था में बदलाव किया है। पहले जहां 100 प्रतिशत भुगतान केंद्र द्वारा किया जाता था, अब नई व्यवस्था में यह बदल गया है।
इस पर एक अन्य सपा सदस्य ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में मनरेगा मजदूरों का करीब 200 करोड़ रुपये बकाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी महंगाई के दौर में मजदूरों की रोजमर्रा की जरूरतें कैसे पूरी होंगी। साथ ही, उन्होंने तकनीक के बावजूद भुगतान में देरी पर भी सरकार को घेरा।
अब 7 दिन में मिलेगा भुगतान: सरकार
इन आरोपों पर जवाब देते हुए विजय लक्ष्मी गौतम ने कहा कि मजदूरों के भुगतान की प्रक्रिया में सुधार किया गया है। अब 15 दिन की बजाय सात दिन के भीतर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
मनरेगा की जगह नया कानून
मनरेगा के नाम परिवर्तन के मुद्दे पर बिना किसी दल का नाम लिए मंत्री ने कहा कि वर्ष 2009 से पहले यह योजना नरेगा के नाम से जानी जाती थी और बाद में राजनीतिक कारणों से इसमें महात्मा गांधी का नाम जोड़ा गया।
उन्होंने मनरेगा की जगह लाए जा रहे ‘विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) अधिनियम’ को अधिक प्रभावी बताते हुए दावा किया कि इसके तहत मजदूरों के लिए कार्य दिवसों की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। सरकार का कहना है कि इस नई योजना को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य से जोड़ा जाएगा।














