अयोध्या: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में इस्तीफा देने वाले अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह का मामला अब सिर्फ एक भावनात्मक त्यागपत्र तक सीमित नहीं रह गया है। बंद कमरे की लंबी बैठकों, पुलिस सुरक्षा, चुप्पी साधे अधिकारियों और अब सगे भाई द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक, प्रशासनिक और व्यक्तिगत विवाद के केंद्र में ला खड़ा किया है।
चार घंटे की बंद कमरे की बैठक, बाहर निकले तो कैमरों से बचते दिखे अधिकारी
मंगलवार देर शाम अयोध्या स्थित GST कार्यालय में जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों के साथ डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह की करीब चार घंटे तक बंद कमरे में बैठक चली। बैठक के बाद जब प्रशांत कुमार सिंह कार्यालय से बाहर निकले तो उन्हें पुलिस सुरक्षा के बीच ले जाया गया। इस दौरान वे मीडिया कैमरों से बचते नजर आए और किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया दिए बिना परिसर से रवाना हो गए।
जब पत्रकारों ने जिला प्रशासन और GST विभाग के अधिकारियों से इस्तीफे को लेकर सवाल पूछे, तो सभी ने कैमरे पर बोलने से इनकार कर दिया। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण को लेकर शासन स्तर पर बातचीत हो चुकी है, जिसके चलते अधिकारी फिलहाल सार्वजनिक बयान देने से बच रहे हैं।
इस्तीफे के पीछे भावनात्मक वजह या दबाव की रणनीति?
प्रशांत कुमार सिंह ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सम्मान में अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया था। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें वे रोते हुए अपनी पत्नी से फोन पर बात करते हुए इस्तीफे की जानकारी देते नजर आए। उसी दिन उन्होंने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को भी अपना त्यागपत्र भेजा।
इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि वे प्रयागराज में शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ की गई कथित अमर्यादित टिप्पणियों से आहत थे और इसी कारण उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया।
सगे भाई के गंभीर आरोप: फर्जी विकलांग प्रमाणपत्र से नौकरी का दावा
मामले ने उस वक्त नया मोड़ ले लिया जब डिप्टी कमिश्नर के सगे बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह सामने आए और उन्होंने प्रशांत कुमार सिंह पर फर्जी विकलांग प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप लगाया।
#Ayodhya अब नई कहानी सामने!
CM @myogiadityanath के समर्थन में इस्तीफ़ा देने वाले अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह पर फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र का आरोप
4 साल से जांच लंबित, मेडिकल बोर्ड के सामने पेश नहीं हुए।
सूत्रों के मुताबिक नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है।#GST #UP pic.twitter.com/sbrlpIbbXJ
— PARDAPHAAS NEWS (@pardaphaas) January 27, 2026
डॉ. विश्वजीत सिंह के अनुसार, उनके भाई ने खुद को 40 प्रतिशत नेत्र विकलांग दर्शाते हुए नौकरी प्राप्त की, जबकि यह प्रमाणपत्र फर्जी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशांत कुमार सिंह ने अपनी जन्मतिथि (Date of Birth) में भी कथित रूप से हेराफेरी की है।
“जांच से बचने के लिए रचा गया इस्तीफे का ड्रामा” — भाई का दावा
डॉ. विश्वजीत सिंह का आरोप है कि यह पूरा इस्तीफा जांच और संभावित रिकवरी से बचने के लिए रचा गया नाटक है। उनका कहना है कि जिस आंख की बीमारी का दावा किया गया है, वह 50 साल से कम उम्र में दुनिया में किसी को नहीं होती।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले की निष्पक्ष और पूर्ण जांच कराने की अपील की है। सूत्रों के मुताबिक, शिकायत के बाद मामले की जांच अंतिम चरण में है और इन नए आरोपों के संबंध में प्रशांत कुमार सिंह से पूछताछ भी की जाएगी।
जांच के घेरे में अधिकारी, सवालों के घेरे में सिस्टम
इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक व्यवस्था, नियुक्ति प्रक्रिया और भावनात्मक अपील के ज़रिये लिए गए फैसलों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां इस्तीफे को मुख्यमंत्री के समर्थन में उठाया गया कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह कदम कानूनी और विभागीय जांच से ध्यान भटकाने का प्रयास तो नहीं।
फिलहाल, अधिकारी चुप हैं, जांच जारी है और सियासत के साथ-साथ प्रशासन भी असहज स्थिति में नजर आ रहा है। अब सबकी निगाहें शासन के अगले कदम और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि यह मामला आस्था, भावुकता और समर्थन का था — या फिर आरोपों से बचाव की एक रणनीति














