Friday, January 16, 2026
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केरल में अस्पतालों की दरें प्रदर्शित करने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

केरल में अस्पतालों के रिसेप्शन और वेबसाइट पर सेवाओं (Services) व दरों (Rates) को प्रदर्शित करने से जुड़े आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने केरल हाई कोर्ट के निर्देशों के आधार पर अस्पतालों के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगाते हुए केंद्र सरकार और केरल सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है।

इस मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को होगी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश पारित किया।

हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती

यह मामला केरल हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें हाई कोर्ट ने अस्पतालों को निर्देश दिया था कि वे अपने रिसेप्शन या प्रवेश डेस्क और आधिकारिक वेबसाइट पर दी जाने वाली सेवाओं की सूची, सामान्य चिकित्सा प्रक्रियाओं की बुनियादी दरें और पैकेज रेट्स स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें।

सॉलिसिटर जनरल से मांगी गई सहायता

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से भी सहायता करने को कहा है। साथ ही, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को अतिरिक्त पक्षकार (Additional Party) के रूप में शामिल किया गया है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट ने पहले ही अधिकारियों को निर्देश दिया था कि मामले के लंबित रहने के दौरान अस्पताल एसोसिएशन के सदस्यों के खिलाफ कोई जबरदस्ती कदम न उठाया जाए।

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

इससे पहले केरल हाई कोर्ट ने अस्पतालों के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि सामान्यतः वह अपीलकर्ताओं पर भारी जुर्माना लगाता, क्योंकि उन्होंने संबंधित कानून और नियमों को लागू करने या उनका पालन सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। कोर्ट ने कहा था कि कानून लागू होने के 7–8 साल बाद भी नियमों का पालन न होना राज्य के नागरिकों को उनके मौलिक अधिकारों और कानून के तहत मिलने वाले लाभों से वंचित करता है।

गाइडलाइंस का पालन अनिवार्य

हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि अस्पतालों द्वारा प्रदर्शित की जाने वाली रेट लिस्ट, ब्रोशर और वेबसाइट की जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाए। सेवाओं, दरों या शिकायत से जुड़े संपर्क विवरण में किसी भी बदलाव को तुरंत दर्शाया जाए और संशोधन की तारीख स्पष्ट रूप से अंकित की जाए। गाइडलाइंस का उल्लंघन होने पर संबंधित कानून के तहत नियामक कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई थी।

अब सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद इस पूरे मामले पर अंतिम फैसला अगली सुनवाई में लिया जाएगा।

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