हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) से एक बेहद शर्मनाक और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां एक मरीज के साथ डॉक्टर द्वारा बेरहमी से मारपीट की गई। बेड पर लेटने पर नाराज डॉक्टर ने मरीज के मुंह पर घूंसे बरसाए। यह घटना न केवल चिकित्सा पेशे की मर्यादा को ठेस पहुंचाती है, बल्कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर इंसानियत को भी शर्मसार करती है।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मरीज के परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। लोगों ने IGMC के मुख्य गेट पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। बढ़ते दबाव और जनआक्रोश को देखते हुए राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी डॉक्टर को तत्काल सस्पेंड कर दिया है।
सरकार ने डॉक्टर को मेडिकल एजुकेशन निदेशालय में रिपोर्ट करने के आदेश दिए हैं। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक हाई पावर कमेटी का गठन किया गया है। IGMC के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. राहुल राव ने बताया कि सरकार के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की गई है और जांच कमेटी सभी पहलुओं की गंभीरता से पड़ताल करेगी।
सांस की तकलीफ बनी विवाद की वजह
जानकारी के अनुसार, मरीज अर्जुन पंवार एंडोस्कोपी कराने के लिए IGMC पहुंचे थे। सांस लेने में तकलीफ होने के कारण वे पास के एक वार्ड में बेड पर जाकर लेट गए। इसी बात पर डॉक्टर से उनकी बहस हो गई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। आरोप है कि डॉक्टर ने पहले अभद्र भाषा का प्रयोग किया और फिर शारीरिक हमला कर दिया।
पूरे घटनाक्रम का वीडियो किसी मौजूद व्यक्ति ने बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बन गया।
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डॉक्टर का पक्ष आना अभी बाकी
MS डॉ. राहुल राव ने बताया कि फिलहाल वायरल वीडियो, मरीज और उसके तीमारदारों के बयान दर्ज किए गए हैं। आरोपी डॉक्टर का पक्ष लिया जाना अभी बाकी है। हाई पावर कमेटी सभी पक्षों को सुनने के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। अस्पताल प्रशासन ने चार घंटे के भीतर प्रारंभिक जांच पूरी कर सरकार को रिपोर्ट भेज दी थी, जिसके आधार पर सस्पेंशन की कार्रवाई की गई।
उन्होंने बताया कि मरीज, तीमारदार और आरोपी डॉक्टर का मेडिकल परीक्षण भी करवाया गया है। पुलिस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर रही है।
अस्पताल में कुछ देर रहा तनाव
आरोपी डॉक्टर से मिलने आरडीए एसोसिएशन के कुछ पदाधिकारी अस्पताल पहुंचे थे, जिससे कुछ समय के लिए माहौल बिगड़ा, हालांकि बाद में स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया। अस्पताल प्रशासन ने लोगों से संयम बरतने और अस्पताल का माहौल शांत बनाए रखने की अपील की है।
डॉक्टर का यह व्यवहार न सिर्फ गैर-पेशेवर है, बल्कि चिकित्सा जैसे मानवीय पेशे और अस्पताल की गरिमा को भी शर्मसार करता है। मरीजों के साथ ऐसा बर्ताव किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।














