उत्तर प्रदेश के संभल हिंसा मामले में एक अहम कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। इस मामले में एएसपी अनुज चौधरी समेत 20 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इस पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
दरअसल, संभल जिले के चंदौसी स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट ने 9 जनवरी को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत आदेश पारित करते हुए एएसपी अनुज चौधरी सहित 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट का यह आदेश संभल हिंसा से जुड़े एक प्रकरण में दिया गया था, जिसके बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई।
यूपी सरकार और ASP अनुज चौधरी की अलग-अलग याचिकाएं
इस आदेश के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार और एएसपी अनुज चौधरी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की हैं। दोनों याचिकाओं में CJM कोर्ट के 9 जनवरी के आदेश को रद्द करने की मांग की गई है।
याचिकाओं में दलील दी गई है कि निचली अदालत का आदेश कानून और तथ्यों के विपरीत है और बिना पर्याप्त आधार के पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया।
156(3) के आदेश पर सवाल
सीजेएम कोर्ट द्वारा धारा 156(3) के तहत दिए गए आदेश को लेकर यह सवाल उठाया गया है कि क्या प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मौजूद थे, जिनके आधार पर इतने वरिष्ठ अधिकारियों समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया जा सकता था। इसी बिंदु पर हाईकोर्ट में विस्तार से बहस होने की संभावना है।
आज की सुनवाई पर टिकी निगाहें
सोमवार को होने वाली इस सुनवाई को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाईकोर्ट यह तय करेगा कि संभल कोर्ट का एफआईआर दर्ज करने का आदेश बरकरार रहेगा या उस पर रोक लगेगी।
यदि हाईकोर्ट निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाता है, तो पुलिस अधिकारियों को बड़ी राहत मिल सकती है। वहीं, अगर आदेश कायम रहता है, तो मामले की जांच औपचारिक रूप से आगे बढ़ेगी।
संभल हिंसा मामला पहले से ही संवेदनशील रहा है और अब इस पर न्यायिक मोर्चे पर होने वाला फैसला प्रदेश की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।














