राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सर संघचालक मोहन भागवत ने शनिवार को वृंदावन में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि जैसे-जैसे धार्मिक, सनातन और हिंदू समाज एकजुट होता जाएगा, वैसे-वैसे आसुरी शक्तियां कमजोर होकर बिखरती चली जाएंगी। उन्होंने कहा कि पिछले 50 वर्षों में यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि हिंदू समाज के संगठित होने के साथ-साथ विभाजनकारी ताकतों के टुकड़े होते गए हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका इशारा किन शक्तियों की ओर था।
भागवत ने कहा कि समाज को जोड़ने का कार्य निरंतर चलता रहना चाहिए। यदि ऐसा हुआ तो आने वाले 20–30 वर्षों में भारत ‘विश्व गुरु’ के रूप में संपूर्ण विश्व को सुख-शांति से भरा नया मार्ग दिखाने वाला राष्ट्र बनेगा। उन्होंने कहा कि भारत का स्वरूप हिंदू राष्ट्र और धर्म राष्ट्र ही रहेगा, इसे कोई बदल नहीं सकता, क्योंकि भारत का जन्म ही इसी उद्देश्य के लिए हुआ है। अब केवल हमारी तैयारी की देरी है, जिसे दूर करने की आवश्यकता है।
रामानन्दाचार्य की 726वीं जयंती पर आयोजन
दरअसल, मोहन भागवत वृंदावन में सुदामा कुटी आश्रम द्वारा आयोजित रामानन्दी सम्प्रदाय के प्रवर्तक स्वामी रामानन्दाचार्य की 726वीं जयंती तथा सुदामा कुटी के संस्थापक संत सुदामा दास के वृंदावन आगमन के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित शताब्दी समारोह में शामिल हुए। यमुना किनारे कुंभ मेला स्थल पर हुए इस विशाल संत-विद्वत सम्मेलन में देश-भर से आए संत-महात्माओं और रामानन्दी सम्प्रदाय के अनुयायियों ने भाग लिया।
आपसी फूट से ही पराजित हुआ हिंदू समाज
अपने संबोधन में संघ प्रमुख ने कहा कि हिंदू समाज कभी भी शत्रुओं की वीरता या शक्ति के कारण पराजित नहीं हुआ, बल्कि जब-जब हार हुई, उसका कारण केवल आपसी फूट रहा। उन्होंने कहा कि मुगलों के शासनकाल में चार-पांच सौ वर्षों की दासता और अत्याचार सहने के बावजूद सनातन परंपरा कमजोर नहीं हुई, बल्कि हर बार और अधिक सशक्त होकर उभरी।
भारत बनेगा सुख-शांति का केंद्र
भागवत ने दोहराया कि आने वाले दशकों में भारत विश्व को सुख-शांति भरा जीवन देने वाला राष्ट्र बनेगा। इसके लिए आवश्यक है कि समाज एकजुट हो और स्वयं को तैयार करे। उन्होंने कहा कि विरोधी ताकतें भीतर से खोखली हो चुकी हैं और पूरी दुनिया में पराजय का सामना कर रही हैं। परिस्थितियां हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं।
#WATCH | Mathura, UP | RSS chief Mohan Bhagwat says, “There should be no discrimination of any kind… We consider the society in which we live as one; we believe the entire Hindu society is one, but the world sees many divisions in it, such as language, caste, sect, community…… pic.twitter.com/hUXHSfrdGr
— ANI (@ANI) January 10, 2026
सामाजिक एकता और पंच परिवर्तन पर जोर
उन्होंने कहा कि संघ सभी हिंदुओं को एक समाज मानता है, लेकिन दुनिया उन्हें अलग-अलग देखती है। इसलिए समाज के हर वर्ग और क्षेत्र में मित्रता और आपसी सहयोग होना चाहिए—केवल पर्व-त्योहारों पर नहीं, बल्कि हर सुख-दुख में। उन्होंने संघ के ‘पंच परिवर्तन’—आत्मनिर्भरता, सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्यों—पर विशेष बल दिया और भेदभाव-मुक्त भारत के निर्माण का आह्वान किया।
कार्यक्रम में अनेक संतों की उपस्थिति
इस अवसर पर मंच पर साध्वी ऋतम्भरा, गीता मनीषी संत ज्ञानानन्द, नाभा पीठाधीश्वर महंत सुतीक्ष्ण दास, अयोध्या मणिराम छावनी के पीठाधीश्वर, पीपा पीठाधीश्वर बलराम दास सहित देश-विदेश से आए अनेक संत-महात्मा मौजूद रहे।
बच्चों को परोसा मध्याह्न भोजन
कार्यक्रम से पूर्व मोहन भागवत ने वृंदावन चंद्रोदय मंदिर में दर्शन-पूजन किया और ‘अक्षय पात्र’ संस्था की परियोजना का अवलोकन किया। उन्होंने मुखराई प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को स्वयं मध्याह्न भोजन परोसा और उनसे संवाद भी किया। इसके अलावा सुदामा कुटी में पुनरोद्धारित मंदिर का लोकार्पण, एक पुस्तिका का विमोचन और गोसेवा आधारित फिल्म ‘गोदान’ का पोस्टर भी जारी किया।














