नई दिल्ली:ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक को लेकर दिए गए बयान पर सियासी विवाद गहरा गया है। बीजू जनता दल (BJD) के सांसद सस्मित पात्रा ने भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे के बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे “बेहद शर्मनाक और झूठा” बताया है। इसी के विरोध में उन्होंने संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति से इस्तीफा दे दिया, जिसकी अध्यक्षता निशिकांत दुबे कर रहे हैं।
पात्रा ने बयान को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
समाचार एजेंसी से बातचीत में सस्मित पात्रा ने निशिकांत दुबे के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बीजू पटनायक को पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, अमेरिका और अन्य संस्थाओं से जोड़ना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और गलत है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान इतिहास को गलत तरीके से पेश करने का प्रयास हैं।
बीजू पटनायक के योगदान का किया जिक्र
पात्रा ने कहा कि बीजू पटनायक का देश की आजादी और राष्ट्र निर्माण में बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने नाजियों के खिलाफ रूसियों की मदद की थी। इसके अलावा 1947 में कश्मीर संघर्ष के समय उन्होंने खुद विमान उड़ाकर भारतीय सैनिकों को वहां पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी।
समिति में काम जारी रखना संभव नहीं
सस्मित पात्रा ने कहा कि बीजू पटनायक जैसे महान व्यक्तित्व के खिलाफ की गई टिप्पणियां निंदनीय हैं। उन्होंने कहा कि जिस संसदीय समिति की अध्यक्षता ऐसे व्यक्ति के हाथ में हो, जिसने बीजू बाबू के बारे में इस तरह की बातें कही हों, वहां सदस्य के रूप में काम करना उनके लिए संभव नहीं है। इसी कारण उन्होंने संचार और आईटी समिति से इस्तीफा दे दिया।
सोशल मीडिया पर भी किया ऐलान
पात्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी अपने इस्तीफे की घोषणा की और कहा कि बीजू पटनायक के सम्मान से समझौता नहीं किया जा सकता।
कैसे शुरू हुआ विवाद
यह विवाद 27 मार्च को शुरू हुआ था, जब निशिकांत दुबे ने 1960 के दशक में भारत की विदेश और रक्षा नीति से जुड़े कुछ आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि 1962 के भारत-चीन युद्ध से पहले और बाद में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के अमेरिका और उसकी खुफिया एजेंसी CIA से संबंध थे। दुबे ने यह भी आरोप लगाया कि बीजू पटनायक ने अमेरिकी सरकार, CIA और नेहरू के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।
इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने नेहरू के कुछ कथित पत्रों का भी जिक्र किया, जिसके बाद यह मुद्दा राजनीतिक विवाद का रूप ले गया है।














