Saturday, April 11, 2026
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कर्नल श्रीकांत पुरोहित के प्रमोशन पर अबू आजमी ने उठाए सवाल, बोले—क्या देश में कानून दो तरह से चलेगा?

भारतीय सेना के अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित को ब्रिगेडियर पद पर प्रमोशन की मंजूरी मिलने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अबू आजमी ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि बहुमत होने के बावजूद देश का शासन संविधान के अनुसार ही चलना चाहिए, न कि मनमानी के आधार पर।

आजमी ने कहा कि पुरोहित और अन्य आरोपियों से जुड़े मामले में सरकारी वकील ने भी यह स्वीकार किया था कि उनके प्रति नरम रुख अपनाने का दबाव था। उन्होंने आरोप लगाया कि कई गवाह अपने बयानों से मुकर गए, लेकिन इसके बावजूद किसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि इसी कारण सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।

आजमी ने इस मामले की तुलना ट्रेन धमाके के एक अन्य मामले से करते हुए कहा कि उस मामले में 187 लोगों की मौत हुई थी और आरोपियों के बरी होने के तुरंत बाद सरकार ने अपील दायर कर दी थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उस मामले में इतनी जल्दी अपील की जा सकती है, तो इस मामले में अपील क्यों नहीं की गई।

उन्होंने कहा कि आम जनता जानना चाहती है कि जब ट्रेन ब्लास्ट के आरोपी 19 साल बाद बरी हुए तो सरकार ने तुरंत अदालत में अपील की, लेकिन जिस विस्फोट मामले में कर्नल पुरोहित और Pragya Singh Thakur जैसे नाम जुड़े रहे, उसमें ऐसा कदम क्यों नहीं उठाया गया। आजमी ने कहा कि इस मामले पर राज्य सरकार और केंद्र सरकार को स्पष्ट बयान देना चाहिए कि अपील क्यों नहीं की गई।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि क्या कानून अलग-अलग लोगों के लिए अलग तरीके से लागू किया जा रहा है। आजमी ने सवाल उठाया कि क्या देश का शासन संविधान के अनुसार चलेगा या फिर मनमानी के आधार पर।

दरअसल, भारतीय सेना ने 10 अप्रैल को कर्नल पुरोहित को ब्रिगेडियर पद पर प्रमोशन के लिए मंजूरी दी है। यह फैसला उस समय आया जब Armed Forces Tribunal (AFT) ने उनके रिटायरमेंट पर रोक लगा दी थी। पुरोहित का रिटायरमेंट 31 मार्च 2026 को होना था, लेकिन उन्होंने प्रमोशन और उससे जुड़े सेवा लाभों को लेकर ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी।

सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने रक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया था कि जब तक उनकी वैधानिक शिकायत पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक उनका रिटायरमेंट रोका जाएगा। इसके बाद सेना ने उनके प्रमोशन को मंजूरी दे दी।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है, जिसमें कानून, न्याय प्रक्रिया और सरकार की भूमिका को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं।

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VIKAS TRIPATHI
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