गाज़ीपुर – जिलाधिकारी अविनाश कुमार के निर्देशन में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत जनपद के 16 ब्लॉकों में 32 टीमें कार्यरत हैं। ये टीमें 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों की स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान और उपचार सुनिश्चित कर रही हैं। कार्यक्रम जन्मजात दोषों, बीमारियों, पोषण संबंधी कमियों और विकास में देरी की जांच करता है तथा जरूरतमंद बच्चों को जिला स्तर पर निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराता है।
मनिहारी ब्लॉक: होंठ कटा दोष वाली बच्ची का सफल उपचार
मनिहारी ब्लॉक की RBSK टीम ने 4 नवंबर 2025 को सिखड़ी ग्राम सभा में कृतिका कुमारी (उम्र 5 माह), पुत्री कमलेश यादव, को होंठ कटा जन्मजात दोष से ग्रस्त पाया।
11 नवंबर 2025 को हेरिटेज अस्पताल, वाराणसी में उसका सफल इलाज किया गया। वर्तमान में बच्ची पूर्णतः स्वस्थ है।
सुभाकरपुर ब्लॉक: हृदय रोग से पीड़ित बच्ची का इलाज जारी
13 नवंबर को सुभाकरपुर ब्लॉक की विजिट के दौरान अर्पिता कुमारी (5 वर्ष 6 माह), पुत्री श्याम सुंदर, ग्राम जल्लापुर, हृदय रोग से पीड़ित पाई गई।
जिला अस्पताल से रेफर किए जाने के बाद अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में उसका उपचार जारी है।
भरौली ग्राम सभा: होंठ-तालु दोष वाले बच्चे का उपचार सफल
1 नवंबर 2021 को भरौली ग्राम सभा में हुई जांच के दौरान आयांश कुमार, पुत्र राजू बिंद, होंठ-तालु जन्मजात दोष से पीड़ित मिला।
8 नवंबर 2021 को हेरिटेज हॉस्पिटल, वाराणसी में उसका सफल उपचार किया गया। बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है।
देवकली ब्लॉक: न्यूरल ट्यूब दोष का सफल ऑपरेशन
देवकली ब्लॉक के रसूलपुर पचरासी ग्राम सभा में 31 जुलाई 2025 को RBSK टीम ने आरोही कुमारी (उम्र 2 वर्ष), पुत्री श्री दशरथ, को न्यूरल ट्यूब जन्मजात दोष से ग्रस्त पाया।
4 अक्टूबर 2025 को झांसी मेडिकल कॉलेज में सर्जरी द्वारा उसका उपचार किया गया। बच्ची अब पूर्णतः स्वस्थ है।
पिता दशरथ ने स्वास्थ्य विभाग की टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य और लाभ
डीपीएम ने बताया कि RBSK टीम पहले 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों की 4D श्रेणी—
जन्मजात दोष, बीमारियाँ कमियाँ
विकास में देरी
की जांच करती है। इसके बाद पहचाने गए बच्चों को प्रारंभिक हस्तक्षेप सेवाएं, अनुवर्ती देखभाल और आवश्यकतानुसार निःशुल्क सर्जरी उपलब्ध करायी जाती है।
आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों एवं स्वास्थ्य सुविधाओं में जांच हेतु विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। गंभीर मामलों में बच्चों को तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाता है।














