प्रयागराज: माघ मेला के दौरान संगम स्नान के लिए जा रहे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के काफिले और पुलिस के बीच हुए टकराव ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। कथित तौर पर शंकराचार्य को संगम में स्नान से रोके जाने और उनके समर्थकों के साथ पुलिस द्वारा बदसलूकी की घटना सामने आने के बाद विपक्ष हमलावर हो गया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बाद अब कांग्रेस ने भी योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 वर्षों से सत्ता में हैं और जिनकी कृपा से वे सत्ता के शिखर तक पहुंचे, आज उन्हीं के साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है—इसे पूरी दुनिया देख रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में आने से पहले मोदी ने खुद को “हिंदुओं का मसीहा” बताकर राजनीति की, लेकिन आज संत समाज के सम्मान की रक्षा करने में सरकार विफल दिख रही है।
पवन खेड़ा ने शंकराचार्य के समर्थकों के साथ कथित पुलिस बदसलूकी के वायरल वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि यह दृश्य बताता है कि प्रधानमंत्री उसी थाली में छेद कर रहे हैं, जिसमें बैठकर वे सत्ता तक पहुंचे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिनके आशीर्वाद से सत्ता मिली, उन्हीं के अनुयायियों के साथ लाठियां चल रही हैं, जबकि सत्ता का वैभव—महंगे कपड़े, लग्ज़री गाड़ियां, निजी जेट और शाही जीवनशैली—लगातार बढ़ती जा रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का अपराध क्या है? क्या इसलिए कि वे सरकार की जय-जयकार नहीं करते? क्या इसलिए कि वे अधूरे मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पर सवाल उठाते हैं, महाकुंभ की व्यवस्थाओं पर उंगली रखते हैं या कोविड काल में गंगा में तैरती लाशों की सच्चाई सामने लाते हैं? पवन खेड़ा ने कहा कि असहमति को अपराध मानने की यह प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की सुरक्षा व्यवस्था का जिक्र करते हुए भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अगर मोहन भागवत को ज़ेड प्लस सुरक्षा और दर्जनों गाड़ियों का काफिला मिल सकता है, तो फिर शंकराचार्य जैसे धर्माचार्य के सम्मान और सुरक्षा को लेकर सरकार की प्राथमिकता क्या है? इसी क्रम में उन्होंने तीखा बयान देते हुए कहा—“नरेंद्र मोदी न काम के हैं, न राम के हैं।”
पवन खेड़ा ने सरकार की राजनीति में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा सत्ता की सियासत में मुसलमानों के लिए जगह क्या है, यह किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कभी कॉलेज बंद कराए जाते हैं, तो कभी स्कूलों पर ताले लगते हैं, और हर मुद्दे को सांप्रदायिक चश्मे से देखा जाता है।
इसके अलावा, उन्होंने वाराणसी में देवी अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति तोड़े जाने की घटना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधा। पवन खेड़ा ने कहा कि जब इस घटना का वीडियो सामने आया तो सरकार ने उसे AI-जनित बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की, जबकि सच्चाई कुछ और है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यह ‘AI’ नहीं, बल्कि ‘बेहयाई’ है।
माघ मेला की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आस्था, असहमति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बिगड़ रहा है। विपक्ष जहां इसे सत्ता के अहंकार का उदाहरण बता रहा है, वहीं सरकार की ओर से अब तक ठोस सफाई का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और तेज़ होने के संकेत दे रहा है।














