नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 फरवरी को इजराइल के दौरे पर रवाना होंगे। आधिकारिक बयान के मुताबिक यह यात्रा भारत और इजराइल के बीच दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ-साथ साझा वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों की समीक्षा का अवसर देगी। दोनों देशों के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों और साझा विज़न पर आधारित सहयोग को नई दिशा देने पर जोर रहेगा।
रक्षा और तकनीक सहयोग पर फोकस
विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि रक्षा और उन्नत तकनीक के क्षेत्र में निर्णायक प्रगति का संकेत हो सकता है।
भारत और इजराइल पहले से ही रक्षा उपकरण, ड्रोन तकनीक, साइबर सुरक्षा, कृषि नवाचार और खुफिया सहयोग में करीबी भागीदार हैं। माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान भारत को कुछ विशेष और उन्नत रक्षा तकनीकों की पेशकश की जा सकती है, जिससे दोनों देशों की सामरिक साझेदारी और गहरी होगी।
‘हेक्सागॉन गठबंधन’ पर चर्चा संभव
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने छह देशों का एक विशेष रणनीतिक गठबंधन बनाने की इच्छा जताई है, जिसे ‘Hexagon’ नाम दिया गया है।
प्रस्तावित समूह में संभावित रूप से ये देश शामिल हो सकते हैं:
इजराइल – टेक्नोलॉजी और रक्षा सहयोग का केंद्र
भारत – हिंद महासागर क्षेत्र की प्रमुख शक्ति और इंडो-अब्राहम सहयोग की कड़ी
संयुक्त अरब अमीरात – अब्राहम समझौते के बाद प्रमुख अरब साझेदार
ग्रीस – पूर्वी भूमध्य सागर में सामरिक सहयोगी
साइप्रस – ऊर्जा और नौसैनिक संतुलन में अहम भूमिका
संयुक्त राज्य अमेरिका – सुरक्षा गारंटी और व्यापक सामरिक समर्थन
मौजूदा ढांचे से व्यापक रणनीति तक
भारत पहले से ही इजराइल, UAE और अमेरिका के साथ I2U2 Group का हिस्सा है। वहीं ग्रीस-साइप्रस-इजराइल ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में त्रिकोणीय सहयोग कर रहे हैं।
नेतन्याहू का ‘हेक्सागॉन’ प्रस्ताव इन मौजूदा साझेदारियों को एक बड़े राजनीतिक और सामरिक ढांचे में बदलने की कोशिश माना जा रहा है, जो पश्चिम एशिया से यूरोप और हिंद महासागर तक फैला होगा।
भारत की रणनीतिक संतुलन नीति
भारत ने अभी तक प्रस्तावित गठबंधन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, मोदी और नेतन्याहू की बैठक में इस विषय पर चर्चा की संभावना है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि भारत इस गठबंधन में शामिल होता है, तो यह इजराइल के लिए बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि होगी—खासकर ऐसे समय में जब गाजा संघर्ष और फिलिस्तीनी मुद्दे को लेकर कई देशों ने इजराइल से दूरी बनाई है।
भारत के लिए यह निर्णय रणनीतिक संतुलन का विषय होगा—एक ओर रक्षा और तकनीकी सहयोग के अवसर, तो दूसरी ओर पश्चिम एशिया में पारंपरिक साझेदारों के साथ संबंधों को संतुलित रखना।
निर्णायक साबित हो सकता है दौरा
25 फरवरी का यह दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्रीय भू-राजनीति पर भी प्रभाव डाल सकता है। रक्षा, ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और बहुपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दों के कारण यह यात्रा भारत-इजराइल संबंधों को नए स्तर पर ले जा सकती है।
अब सबकी नजर मोदी-नेतन्याहू वार्ता पर है—क्या ‘हेक्सागॉन’ गठबंधन को औपचारिक आकार मिलेगा या यह अभी रणनीतिक चर्चा तक सीमित रहेगा।














