नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते हालातों को लेकर केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक अहम वर्चुअल बैठक की। इस बैठक में मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संकट के भारत पर पड़ने वाले आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय प्रभावों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्यों की तैयारियों, योजनाओं और संभावित चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर चर्चा करना था। खास बात यह रही कि जिन राज्यों में चुनावी आचार संहिता लागू है और जहां जल्द चुनाव होने हैं, वहां के मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं हुए।
केंद्र और राज्यों के शीर्ष नेता शामिल
इस उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी मौजूद रहीं।
वहीं, मुख्यमंत्रियों में एन. चंद्रबाबू नायडू, विष्णु देव साय, ए. रेवंत रेड्डी, योगी आदित्यनाथ, उमर अब्दुल्ला, भगवंत मान, मोहन यादव, हेमंत सोरेन, पुष्कर सिंह धामी, भूपेंद्र पटेल, देवेंद्र फडणवीस और मोहन चरण माझी सहित कई राज्यों के नेता जुड़े।
पीएम मोदी ने हालात को बताया ‘बेहद चिंताजनक’
प्रधानमंत्री पहले ही संसद के दोनों सदनों में पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर चिंता जता चुके हैं। उन्होंने कहा था कि यह संकट तीन सप्ताह से अधिक समय से जारी है और इसके प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ रहे हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर
सरकार के अनुसार इस संघर्ष का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। कच्चे तेल और गैस की कीमतों में अस्थिरता से भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर दबाव बढ़ सकता है। इससे महंगाई, उद्योग और आम लोगों के जीवन पर असर पड़ने की आशंका है।
खाड़ी देशों में भारतीयों की सुरक्षा प्राथमिकता
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि खाड़ी देशों में रह रहे करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए भारत लगातार संबंधित देशों के संपर्क में है और जरूरत पड़ने पर राहत एवं निकासी योजनाएं भी तैयार रखी गई हैं।
राज्यों को दिए अहम निर्देश
बैठक में प्रधानमंत्री ने राज्यों को निर्देश दिया कि वे ऊर्जा आपूर्ति, महंगाई नियंत्रण और आपात स्थितियों से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखें। साथ ही विदेशों में रहने वाले भारतीयों के परिवारों की मदद के लिए राज्य स्तर पर समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
अपडेट:
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार आने वाले दिनों में हालात की समीक्षा के लिए इस तरह की और बैठकें कर सकती है। सरकार हर स्तर पर निगरानी बनाए हुए है ताकि किसी भी स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।














