पाकिस्तान की जानी-मानी मानवाधिकार वकील और सामाजिक कार्यकर्ता ईमान मजारी एक बार फिर विवादों और सुर्खियों में हैं। ईमान मजारी और उनके पति हादी अली चट्ठा पर सेना और राज्य संस्थाओं के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियां करने का आरोप है। दोनों पर अक्टूबर 2024 में मामला दर्ज किया गया था और हाल ही में उनकी जमानत याचिकाएं अदालत द्वारा खारिज कर दी गई हैं।
इसी बीच बुधवार को ईमान मजारी और हादी अली चट्ठा ने इस्लामाबाद की एक अदालत में आवेदन दाखिल कर सेना के मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के महानिदेशक (DG ISPR) को गवाह के रूप में तलब करने की मांग की है।
DG ISPR पर क्या लगाए गए हैं आरोप?
ईमान मजारी ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी, जो वर्तमान में DG ISPR हैं, ने जनवरी 2026 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्हें “देशद्रोहियों की वकील” और “विदेशी एजेंट” बताया। ईमान का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियों से न केवल उनकी छवि को नुकसान पहुंचा, बल्कि इससे न्यायिक प्रक्रिया भी प्रभावित हुई।
हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष को किसी गवाह को पेश करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मोहम्मद अफ़ज़ल माजोका ने कहा कि उन्होंने स्वयं वह प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं देखी है और DG ISPR को तलब करने से पहले अभियोजन पक्ष का जवाब जरूरी है। अदालत ने औपचारिक रूप से इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए इसकी प्रति अभियोजन टीम को सौंप दी है।
किस कानून के तहत चल रहा है मामला?
ईमान मजारी और उनके पति पर प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट (PECA) के तहत मुकदमा चल रहा है। अभियोजन का आरोप है कि दोनों के सोशल मीडिया पोस्ट्स ने भाषाई आधार पर विभाजन को बढ़ावा दिया और सशस्त्र बलों को आतंकवाद से जोड़कर प्रस्तुत किया।
बुधवार की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के गवाह शह्रोज रियाज से जिरह की गई। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी है।
FIR में क्या आरोप लगाए गए हैं?
राष्ट्रीय साइबर क्राइम जांच एजेंसी (NCCIA) द्वारा दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि इस दंपति ने खैबर-पख्तूनख्वा और बलोचिस्तान में जबरन गायब किए जाने के मामलों के लिए सुरक्षा बलों को जिम्मेदार ठहराया।
एफआईआर के अनुसार, ईमान मजारी ने ऐसे बयान और सोशल मीडिया पोस्ट साझा किए जो कथित रूप से प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों, जैसे बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), की विचारधारा से मेल खाते हैं। वहीं, हादी अली चट्ठा पर ईमान की पोस्ट्स को री-पोस्ट करने का आरोप है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि दोनों ने सशस्त्र बलों को इन संगठनों के खिलाफ कार्रवाई में नाकाम दिखाने की कोशिश की। हालांकि ईमान मजारी और हादी अली चट्ठा ने सभी आरोपों से साफ इनकार किया है।
कौन हैं ईमान मजारी?
ईमान मजारी पाकिस्तान की प्रमुख मानवाधिकार वकीलों में से एक हैं और अक्सर राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों पर मुखर रही हैं। बीबीसी के अनुसार, वह एक राजनीतिक रूप से सक्रिय परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनकी मां शिरीन मजारी पाकिस्तान की पूर्व मानवाधिकार मंत्री और इमरान खान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुकी हैं।
ईमान मजारी ने यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग लॉ स्कूल से कानून की पढ़ाई की है और उनका करियर मुख्य रूप से मानवाधिकार मामलों पर केंद्रित रहा है। उन्होंने धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों के साथ-साथ राज्य हिंसा के पीड़ितों की कानूनी पैरवी की है।
अगस्त 2023 में उन्होंने पश्तून तहफ्फुज़ मूवमेंट (PTM) की एक रैली में भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने सेना पर नागरिकों के खिलाफ हिंसा बढ़ाने और नागरिक संस्थानों पर अत्यधिक नियंत्रण रखने का आरोप लगाया था। उन्होंने सेना प्रतिष्ठान के कुछ हिस्सों को “असल आतंकवादी” तक कहा था। बीबीसी के मुताबिक, इसी भाषण के बाद उन्हें देशद्रोह और आतंकवाद से जुड़े आरोपों में गिरफ्तार किया गया था।














