Friday, January 16, 2026
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चीन के ‘मध्यस्थता’ दावे पर ओवैसी भड़के, बोले– यह भारत का अपमान, सरकार करे कड़ा खंडन

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भारत-पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मध्यस्थता कराने के चीन के दावे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस दावे का कड़े शब्दों में आधिकारिक खंडन करने की मांग की है।

दरअसल, चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को दावा किया था कि इस साल चीन ने जिन अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मध्यस्थता की, उनमें भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव भी शामिल है। इस बयान के बाद भारतीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

“भारत की संप्रभुता की कीमत पर रिश्ते सामान्य नहीं हो सकते”

ओवैसी ने इस दावे को देश का अपमान बताते हुए कहा कि भारत के सम्मान और संप्रभुता से समझौता कर चीन के साथ संबंध सामान्य नहीं किए जा सकते। बुधवार देर रात सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, “पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्षविराम करवाने और व्यापार प्रतिबंधों के जरिए शांति सुनिश्चित करने का दावा किया, और अब चीन के विदेश मंत्री भी आधिकारिक तौर पर मध्यस्थता का दावा कर रहे हैं। यह भारत का अपमान है और सरकार को इसका कड़ा खंडन करना चाहिए।”

पीएम मोदी पर भी उठाए सवाल

ओवैसी ने आरोप लगाया कि चीन भारत और पाकिस्तान को एक ही स्तर पर रखने की कोशिश कर रहा है और दक्षिण एशिया में खुद को एक श्रेष्ठ शक्ति के रूप में पेश करना चाहता है।
उन्होंने सवाल उठाया, “क्या प्रधानमंत्री की चीन यात्रा के दौरान मोदी सरकार ने इस तरह की किसी भूमिका पर सहमति जताई थी?”

ओवैसी ने कहा कि चीन के विदेश मंत्री का यह दावा चौंकाने वाला है और केंद्र सरकार को स्पष्ट रूप से यह संदेश देना चाहिए कि भारत किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता

भारत का पुराना रुख: द्विपक्षीय समाधान

भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं और किसी तीसरे देश की भूमिका स्वीकार्य नहीं है। भारत के अनुसार, 7 से 10 मई के बीच हुए सैन्य टकराव को दोनों देशों के डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस) के बीच सीधी बातचीत के जरिए रोका गया था।

केंद्र सरकार ने किया चीन के दावे का खंडन

चीन के विदेश मंत्री के बयान पर बुधवार को केंद्र सरकार ने आधिकारिक खंडन किया। इससे पहले सरकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऐसे ही दावों को भी खारिज कर चुकी है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के खिलाफ भारत का रुख पूरी तरह से स्पष्ट और अपरिवर्तित है।

कूटनीतिक संदेश

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और विदेश नीति के मूल सिद्धांतों को केंद्र में ला दिया है। भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा, संप्रभुता और क्षेत्रीय मुद्दों पर किसी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा।

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VIKAS TRIPATHI
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VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
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