संसद में सरकार को घेरने के लिए विपक्ष एकजुट होता नजर आ रहा है, जिसमें कांग्रेस नेतृत्व की अहम भूमिका है। इसी रणनीति के तहत कांग्रेस में लगातार बैक-टू-बैक बैठकें हो रही हैं। बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक अर्जेंट बैठक बुलाई, जिसमें गुरुवार को होने वाली अहम बैठकों से पहले पार्टी के भीतर दिशा-निर्देश तय किए गए।
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार सुबह 10 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यालय में विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर्स की बैठक होगी। इसके तुरंत बाद सुबह 10:30 बजे कांग्रेस के लोकसभा सांसदों की बैठक सीसीपी (कांग्रेस संसदीय दल) कार्यालय में आयोजित की जाएगी। इन बैठकों में संसद के भीतर सरकार के खिलाफ साझा रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।
बंगाल चुनाव पर भी फोकस, बड़ी बैठक गुरुवार दोपहर
संसद सत्र के साथ-साथ कांग्रेस की नजर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पर भी टिकी हुई है। आज खरगे के आवास पर होने वाली खरगे-राहुल और बंगाल कांग्रेस नेताओं की बैठक को टाल दिया गया है। अब यह बैठक गुरुवार दोपहर 12:30 बजे खरगे के आवास पर होगी।
इस बैठक में पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर गहन मंथन किया जाएगा। पार्टी के भीतर इस बात पर मतभेद हैं कि कांग्रेस को चुनाव अकेले लड़ना चाहिए या गठबंधन के साथ। जहां अधिकांश नेता अकेले चुनाव लड़ने के पक्ष में हैं, वहीं वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी वाम दलों के साथ गठबंधन के समर्थक हैं। कुछ नेता तृणमूल कांग्रेस के साथ तालमेल की संभावनाओं पर भी विचार कर रहे हैं।
‘राहुल गांधी को जानबूझकर बोलने से रोका जा रहा’
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि पिछले तीन दिनों से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा,
“राहुल गांधी लगातार अहम और संवेदनशील मुद्दे उठा रहे हैं, इसलिए उन्हें जानबूझकर अपना भाषण पूरा नहीं करने दिया जा रहा। नेता प्रतिपक्ष को जिस तरह रोका जा रहा है, उसे कांग्रेस बर्दाश्त नहीं करेगी।”
बीजेपी पर अपमानजनक टिप्पणियों का आरोप
जयराम रमेश ने कहा कि इन तमाम मुद्दों को लेकर आज पार्टी की बैठक हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी नेता कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्रियों पर अपमानजनक टिप्पणियां कर रहे हैं, जिसका कांग्रेस कड़ा विरोध करती है। पार्टी की मांग है कि ऐसे नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि संसदीय परंपरा के अनुसार सदन में बहस की शुरुआत नेता प्रतिपक्ष करते हैं और प्रधानमंत्री जवाब देते हैं।
“जब तक नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया जाएगा, तब तक प्रधानमंत्री के जवाब देने का कोई औचित्य नहीं है,” जयराम रमेश ने कहा।














