
NoidaAuthority: नोएडा, एक ऐसा शहर जो स्मार्ट सिटी बनने की ओर अग्रसर है, लेकिन जहां की सड़कें आपको ऐसा अनुभव कराएंगी जैसे आप किसी ऑफ-रोड रैली का हिस्सा हैं। सड़कों की मरम्मत का काम तो जैसे प्राधिकरण की प्राथमिकता सूची में है ही नहीं। लेकिन ऐलिवेटेड रोड? बस नाम सुनते ही भूमि पूजन से लेकर शिलान्यास तक की प्रक्रिया में एक नई ऊर्जा देखने को मिलती है।
गुरुवार को सेक्टर-14ए में एक ऐतिहासिक नजारा देखने को मिला। नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) डॉ. लोकेश एम खुद ठेकेदार के साथ भूमि पूजन करने पहुंचे। ऐसा दृश्य पहले नहीं देखा गया था कि एक एलिवेटेड रोड के लिए इतने उत्साह और भव्यता के साथ अनुष्ठान किया जाए। शायद सड़क के गड्ढों में जनता को गिरते देख अब प्राधिकरण को भगवान का आशीर्वाद लेने की जरूरत महसूस हुई होगी।
चिल्ला एलिवेटेड रोड : विकास की नई इबारत या जनता की नई आफत?
चिल्ला एलिवेटेड रोड, दिल्ली और नोएडा को जोड़ने वाला बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट है, जिसका निर्माण कार्य 44 महीने के लंबे इंतजार के बाद फिर से शुरू हुआ है। इस परियोजना पर कुल 892 करोड़ रुपये की लागत आएगी और इसे तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

रोड की विशेषताएं:
• कुल लंबाई: 5.589 किलोमीटर
• लेन: 6 लेन
• पिलर: 296 पिलर
• लूप: 5 लूप
• समय सीमा: 3 वर्ष
• कुल बजट: 892 करोड़ रुपये
• संभाग: नोएडा प्राधिकरण और सेतु निगम
• निर्माण का बंटवारा: आधी राशि प्रदेश सरकार और आधी राशि नोएडा प्राधिकरण वहन करेगा
पांच लूप: हर दिशा में आसान सफर (कथित रूप से)
• लूप 1: सेक्टर-14 और 15 से महामाया फ्लाईओवर की ओर जाने के लिए
• लूप 2: दिल्ली से नोएडा आ रहे वाहनों को सेक्टर-16 में उतारने के लिए
• लूप 3: सेक्टर-16 से महामाया फ्लाईओवर पर चढ़ने के लिए
• लूप 4: महामाया फ्लाईओवर से आने वाले वाहनों को डीएनडी फ्लाईवे पर जाने के लिए
• लूप 5: दिल्ली से आ रहे वाहनों को सेक्टर-18 में उतारने के लिए
जनता की उम्मीदें : सड़क या सपना?
नोएडा की जनता अब यही सोच रही है कि क्या इस एलिवेटेड रोड के बनने के बाद वे बिना गड्ढों के सफर कर पाएंगे, या फिर ऊंचाई पर चलने वाली सड़कों के नीचे उनकी उम्मीदें हमेशा की तरह दबी रह जाएंगी? ऐलिवेटेड रोड पर चढ़ने वाले पांच लूप तो जनता को नई दिशा दिखाएंगे, लेकिन नीचे की सड़कों पर हर मोड़ पर उनका धैर्य जरूर लूप में फंसा रहेगा।
गड्ढों में विकास का प्रतिबिंब
नोएडा की सड़कों की स्थिति देखकर ऐसा लगता है जैसे गड्ढों को शहर का आधिकारिक प्रतीक बना दिया गया है। हर दिन वाहन चालक इन गड्ढों से बचने की कोशिश में मानो अपने वाहन की “सस्पेंशन टेस्टिंग” कर रहे होते हैं। आए दिन टायर फटना, सस्पेंशन खराब होना और दुर्घटनाएं होना यहां आम बात हो चुकी है।
लेकिन प्राधिकरण के लिए ये समस्याएं कोई मायने नहीं रखतीं। उनकी प्राथमिकता केवल चिल्ला एलिवेटेड रोड है, जो ऊपर से गुजरने वाले लोगों को शायद शहर के गड्ढों की असलियत कभी देखने ही नहीं देगा।

कागजों में विकास, सड़कों पर विनाश
दिल्ली-नोएडा को जोड़ने वाला यह प्रोजेक्ट भले ही लाखों वाहनों को राहत देने का दावा कर रहा हो, लेकिन क्या नोएडा की सड़कों पर चलने वाली जनता को भी कोई राहत मिलेगी? सवाल यह भी है कि जिन सड़कों पर चलकर लोग इस ऐलिवेटेड रोड तक पहुंचेंगे, वे कब तक खस्ताहाल बनी रहेंगी?
शायद, अगली बार जब किसी सड़क के गड्ढे में गिरने के बाद कोई वाहन चालक अपनी किस्मत को कोसे, तो उसे याद रखना चाहिए कि प्राधिकरण ने विकास का एक और शिलान्यास कर दिया है। क्योंकि नोएडा में सड़कें भले ही टूटी हों, पर विकास के पोस्टर हमेशा चमचमाते रहेंगे।

VIKAS TRIPATHI
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