उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र में बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मनोज भाटी के खिलाफ फर्जी शैक्षणिक डिग्री और धोखाधड़ी समेत कई गंभीर आरोपों में मुकदमा दर्ज होने से कानूनी और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि यह एफआईआर करीब एक सप्ताह पहले दर्ज की गई थी, जिसकी जांच अब तेज कर दी गई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार मनोज भाटी ने कथित रूप से फर्जी शैक्षणिक डिग्री और दस्तावेजों के आधार पर स्वयं को योग्य अधिवक्ता के रूप में प्रस्तुत किया। आरोप है कि इन दस्तावेजों का उपयोग कर उन्होंने न केवल पेशेवर बल्कि सामाजिक स्तर पर भी अनुचित लाभ उठाया। पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 471 सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं में केस दर्ज किया है।
अध्यक्ष चुने जाने के बाद सामने आया मामला
जानकारी के मुताबिक मनोज भाटी हाल ही में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए थे। उनके पदभार संभालने के कुछ ही दिनों बाद यह मामला सामने आया, जिससे अधिवक्ता समुदाय में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे उन्होंने विभिन्न लाभ प्राप्त किए। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने पहले भी प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
राजनीतिक साजिश का आरोप
वहीं मनोज भाटी ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए इसे राजनीतिक और व्यक्तिगत रंजिश का परिणाम बताया है। उनका कहना है कि उनकी बढ़ती सामाजिक और पेशेवर सक्रियता से कुछ लोग असहज थे, जिसके चलते उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाया गया है। उन्होंने जांच में पूरा सहयोग करने की बात कही है। मनोज भाटी की ओर से अदालत में जमानत प्रार्थना पत्र भी दाखिल किया गया है, जिसमें गिरफ्तारी से राहत की मांग की गई है।
जांच जारी, दस्तावेजों की हो रही पुष्टि
फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। नॉलेज पार्क थाना पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जा रही है। संबंधित शैक्षणिक संस्थानों से दस्तावेजों का सत्यापन कराया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच पूरी होने के बाद साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
अंतरिम जमानत के लिए याचिका दाखिल
इस बीच मामले में अंतरिम जमानत के लिए जिला न्यायालय में बार एसोसिएशन के सचिव शोभाराम के नाम से प्रार्थनापत्र दाखिल किया गया है। याचिका में दावा किया गया है कि यह मुकदमा राजनीतिक विरोधियों के दबाव में दर्ज कराया गया है। प्रार्थनापत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस प्रकरण के कारण मनोज भाटी को सामाजिक और मानसिक रूप से गंभीर क्षति पहुंची है। अंतरिम जमानत के लिए यह याचिका 3 जनवरी को न्यायालय में प्रस्तुत की गई है।














