Wednesday, February 18, 2026
Your Dream Technologies
HomeNational‘मुसलमान अपने धर्म पर कायम रहेंगे’: घर वापसी बयान पर मौलाना अरशद...

‘मुसलमान अपने धर्म पर कायम रहेंगे’: घर वापसी बयान पर मौलाना अरशद मदनी का तीखा पलटवार, संविधान की धर्मनिरपेक्षता पर दिया जोर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के ‘घर वापसी’ संबंधी बयान पर देशभर में सियासी और सामाजिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। इसी क्रम में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि “मुसलमान जिंदा हैं और अपने धर्म पर जिंदा रहेंगे।”

मंगलवार (17 फरवरी) को लखनऊ में दिए गए बयान में मोहन भागवत ने भारतीय मुसलमानों की ‘घर वापसी’ का जिक्र किया था, जिसके बाद कई मुस्लिम संगठनों ने नाराजगी जताई। इसी मुद्दे पर मौलाना मदनी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी।

‘देश को बांटने वाली आवाज वफादारी नहीं’

मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि “जो बातें सत्तर वर्षों में कहने वाले पैदा नहीं हुए थे, आज वे बीस करोड़ मुसलमानों की घर वापसी की बात कर रहे हैं।” उन्होंने तंज करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो देशभक्ति का ठेका कुछ लोगों ने ही ले रखा हो।

उन्होंने कहा कि जो आवाज देश को तबाही, बदअमनी और आपसी दुश्मनी की ओर ले जाए, उसे देश के प्रति वफादारी की आवाज नहीं कहा जा सकता। मदनी ने जोर देकर कहा कि भारत की मजबूती विविधता, सह-अस्तित्व और संवैधानिक मूल्यों में निहित है।

‘देश में नफरत का माहौल बनाया जा रहा’

मदनी ने आरोप लगाया कि देश में नफरत का वातावरण तैयार किया जा रहा है। उन्होंने लिंचिंग की घटनाओं और गाय के नाम पर हिंसा का उल्लेख करते हुए कहा कि बेगुनाहों की हत्या की घटनाएं समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह घोषणा करते फिर रहे हैं कि देश में वही रहेगा जो उनकी विचारधारा का अनुसरण करेगा, जो न केवल भारतीय संविधान का उल्लंघन है बल्कि देश की एकता और अखंडता के लिए भी खतरनाक है।

‘मुसलमानों को मिटाने वाले खुद मिट गए’

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष ने कहा कि उनका संगठन शुरू से सांप्रदायिक और नफरत फैलाने वाली सोच का विरोध करता आया है और आगे भी करता रहेगा।

उन्होंने कहा, “मुसलमान जिंदा हैं और अपने धर्म पर कायम रहेंगे। मुसलमानों को मिटाने वाले खुद मिट गए, मगर इस्लाम जिंदा है और कयामत तक जिंदा रहेगा।”

मदनी ने दोहराया कि भारत में शांति, भाईचारा और आपसी सद्भाव केवल धर्मनिरपेक्ष संविधान की छाया में ही संभव है।

‘धर्म के नाम पर हिंसा स्वीकार नहीं’

मौलाना मदनी ने स्पष्ट किया कि धर्म के नाम पर किसी भी प्रकार की हिंसा स्वीकार्य नहीं हो सकती। उनके अनुसार सभी धर्म मानवता, प्रेम, सहिष्णुता और एकता का संदेश देते हैं।

उन्होंने कहा कि जो लोग धर्म का इस्तेमाल नफरत और हिंसा फैलाने के लिए करते हैं, वे अपने धर्म के सच्चे अनुयायी नहीं हो सकते। ऐसे तत्वों की हर स्तर पर निंदा और विरोध किया जाना चाहिए।

मोहन भागवत के बयान और उस पर आई प्रतिक्रियाओं ने एक बार फिर देश में धर्म, पहचान और संविधान के मूल्यों पर बहस को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर और भी प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।

- Advertisement -
Your Dream Technologies
VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Call Now Button