Friday, January 23, 2026
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महाराष्ट्र निकाय चुनाव: कप्तान मलिक की हार, कांग्रेस को कुर्ला वेस्ट में बड़ी जीत

महाराष्ट्र में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) समेत राज्य के सभी 29 नगर निकाय चुनावों के नतीजे आज घोषित किए जा रहे हैं. इन नतीजों में कई बड़े राजनीतिक नामों को झटका लगा है. इसी कड़ी में पूर्व मंत्री नवाब मलिक के भाई कप्तान मलिक को कुर्ला वेस्ट से चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है.

कप्तान मलिक को एनसीपी (अजित पवार गुट) ने वार्ड 165 से मैदान में उतारा था और इस सीट को लेकर पार्टी ने काफी जोर लगाया था. हालांकि, मतदाताओं ने इस बार अलग फैसला सुनाया.

कांग्रेस उम्मीदवार अशरफ आजमी की शानदार जीत

कुर्ला वेस्ट सीट से कांग्रेस उम्मीदवार अशरफ आजमी ने बड़ी और निर्णायक जीत दर्ज की है. यह जीत कांग्रेस के लिए इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि यह इलाका लंबे समय से कड़े मुकाबलों और त्रिकोणीय-चौकोर संघर्ष के लिए जाना जाता रहा है.

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अशरफ आजमी की जीत ने यह संकेत दे दिया है कि स्थानीय मुद्दों, संगठनात्मक मजबूती और उम्मीदवार की छवि ने इस बार बड़ी भूमिका निभाई.

इस सीट पर कौन-कौन था मैदान में?

कुर्ला वेस्ट सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा, जहां प्रमुख उम्मीदवार थे:

कांग्रेस: अशरफ आजमी (विजेता)

बीजेपी: रुपेश नारायण पवार

एनसीपी (अजित पवार गुट): कप्तान मलिक

एनसीपी (शरद पवार गुट): अभिजीत दिलीप कांबले

चार प्रमुख दलों के उम्मीदवारों की मौजूदगी के कारण यह सीट पूरे चुनाव के दौरान चर्चा में बनी रही.

नवाब मलिक परिवार को लेकर चला विवाद

इस चुनाव में नवाब मलिक और उनके परिवार को लेकर पहले से ही विवाद का माहौल बना हुआ था. अजित पवार गुट द्वारा एक ही परिवार के तीन सदस्यों को टिकट दिए जाने पर विपक्ष के साथ-साथ पार्टी के भीतर भी सवाल उठे थे.

एनसीपी (अजित पवार गुट) ने:

कप्तान मलिक को वार्ड 165 से

उनकी बहन डॉ. सईदा खान को वार्ड 169 से

कप्तान मलिक की बहू बुसरा नदीम मलिक को वार्ड 170 से

टिकट दिया था.
एक ही परिवार के तीन लोगों को टिकट मिलने से कार्यकर्ताओं में नाराजगी और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी. यही कारण माना जा रहा है कि मतदाताओं ने इस बार परिवारवाद के खिलाफ रुख अपनाया.

मतदाताओं का बदला हुआ मिजाज

कप्तान मलिक की हार को अब परिवारवाद, आंतरिक असंतोष और चुनावी माहौल से जोड़कर देखा जा रहा है. नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि इस बार मतदाताओं ने बड़े नामों के बजाय ज़मीनी जुड़ाव और भरोसे को प्राथमिकता दी.

अरुण गवली की बेटी योगिता गवली को भी झटका

इन चुनावों में एक और बड़ा नाम हार का सामना करता दिखा. पूर्व विधायक अरुण गवली की बेटी योगिता गवली को भी निराशा हाथ लगी है.
योगिता गवली ने बायकला वार्ड नंबर 207 से चुनाव लड़ा था, लेकिन वे जीत दर्ज नहीं कर सकीं.

इस सीट से बीजेपी उम्मीदवार रोहिदास लोखंडे ने जीत हासिल की, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि बायकला क्षेत्र में मतदाताओं ने भाजपा के पक्ष में भरोसा जताया.

नतीजों का सियासी संदेश

इन चुनावी नतीजों ने यह संकेत दे दिया है कि:

परिवारवाद अब मतदाताओं को स्वीकार्य नहीं

स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवार की साख अहम हो गई है

बड़े राजनीतिक नामों को भी ज़मीनी हकीकत का सामना करना पड़ रहा है

नगर निकाय चुनावों के ये नतीजे आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए राजनीतिक दलों के लिए बड़ा संकेत माने जा रहे हैं.

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