ईटा-2 स्थित ग्रेड्स इंटरनेशनल स्कूल में आज शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को भारत विकास परिषद् विवेकानन्द शाखा के तत्वावधान में स्वामी विवेकानन्द जयंती एवं महासमूह गान कार्यक्रम का गरिमामय आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक चेतना और प्रेरणादायी विचारों से सराबोर नजर आया।
कार्यक्रम का शुभारंभ संगीत शिक्षिका संचारी भट्टाचार्य के संयोजन में राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् के सस्वर गायन से हुआ। इसके पश्चात विद्यालय के सभी छात्र-छात्राओं एवं शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सामूहिक रूप से “हम करें राष्ट्र आराधन” महासमूह गान प्रस्तुत कर देशभक्ति की भावना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त किया।
मुख्य वक्ता प्रो. विवेक कुमार ने स्वामी विवेकानन्द के जीवन और दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि बचपन से ही मेधावी नरेंद्र नाथ दत्त जब स्वामी रामकृष्ण परमहंस के शिष्य बने, तब उन्होंने “मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है” के महान सिद्धांत को अपने जीवन का मूल मंत्र बना लिया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानन्द का मानना था कि जिस प्रकार एक पक्षी एक पंख के सहारे उड़ान नहीं भर सकता, उसी प्रकार समाज भी महिलाओं की समान भागीदारी के बिना प्रगति नहीं कर सकता।
प्रो. कुमार ने विद्यार्थियों को स्वामी विवेकानन्द के अमर संदेश “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत” को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।
विद्यालय की प्रधानाचार्या अदिति बसु रॉय ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी विवेकानन्द का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके विचार न केवल वर्तमान समय में प्रासंगिक हैं, बल्कि आने वाले हजारों वर्षों तक मानव समाज को दिशा और ऊर्जा प्रदान करते रहेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों से विवेकानन्द के आदर्शों को अपने आचरण में उतारने का आग्रह किया।
भारत विकास परिषद् विवेकानन्द शाखा के अध्यक्ष विवेक अरोरा ने भारतीय संस्कृति पर प्रकाश डालते हुए एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि केवल अपने लिए करना और खाना मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति है, दूसरों से छीनकर खाना विकृति है, जबकि समाज के साथ मिल-बाँटकर करना और खाना ही हमारी सच्ची भारतीय संस्कृति है। उन्होंने सामाजिक समरसता और सहयोग की भावना को मजबूत करने पर बल दिया।
कार्यक्रम में कोऑर्डिनेटर सुशीला, बबीता, तमन्ना, रवि मेहरा सहित विद्यालय के अनेक शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहीं। अंत में सभी ने स्वामी विवेकानन्द के विचारों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।














