मणिपुर में नई सरकार गठन की प्रक्रिया एक बार फिर तेज हो गई है। भाजपा हाईकमान ने अपने सभी 37 विधायकों को 14 दिसंबर को दिल्ली पहुंचने के निर्देश दिए हैं। पार्टी नेतृत्व के साथ होने वाली इस बैठक में सरकार गठन को लेकर अगले कदम पर मंथन किया जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने 9 फरवरी 2025 को इस्तीफ़ा दिया था, जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। माना जा रहा था कि इस्तीफ़े के तुरंत बाद भाजपा नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा करेगी, लेकिन राजनीतिक स्थिति स्पष्ट न होने के कारण यह निर्णय टल गया था। अब पार्टी एक बार फिर राज्य में सरकार बनाने के प्रयासों में जुट गई है।
3 मई 2023 से शुरू हुआ था मणिपुर का जातीय संघर्ष
मणिपुर में जातीय हिंसा 3 मई 2023 को तब भड़की जब मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग पर कुकी और मैतेई समुदाय आमने-सामने आ गए। रैलियों के बाद शुरू हुई झड़पें धीरे-धीरे बड़े दंगों में बदल गईं, जिनमें कई जिलों में आगजनी, हिंसा और जानमाल का भारी नुकसान हुआ।
हालांकि छिटपुट घटनाओं को छोड़ दें, तो फिलहाल राज्य की स्थिति अपेक्षाकृत शांत बताई जा रही है।
हिंसा की मुख्य वजह क्या थी?
मैतेई समुदाय ST दर्जे की मांग कर रहा था ताकि उन्हें भी जनजातीय अधिकार और आरक्षण लाभ मिल सकें।
कुकी और अन्य पहाड़ी जनजातियाँ इसका विरोध कर रही थीं। उनका कहना था कि मैतेई समुदाय को ST दर्जा मिलने पर उनके भूमि अधिकार और सामाजिक-राजनीतिक हित प्रभावित हो सकते हैं।
बीरेन सिंह ने इस्तीफ़ा देते हुए मांगी थी माफी
इस्तीफ़े के समय पूर्व सीएम एन. बीरेन सिंह ने राज्य की जनता से माफी मांगते हुए कहा था कि बीता साल मणिपुर के लिए बेहद कठिन रहा। उन्होंने स्वीकार किया कि हिंसा में कई लोगों की जान गई, हजारों लोग विस्थापित हुए और अनेक परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
उन्होंने उम्मीद जताई थी कि आने वाले वक्त में राज्य में शांति और सामान्य स्थिति पूरी तरह बहाल हो जाएगी।














