Sunday, April 5, 2026
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“तीन-भाषा फॉर्मूला पर सियासी घमासान: धर्मेंद्र प्रधान का स्टालिन पर पलटवार, बोले—NEP 2020 ‘भाषाई आजादी’ का रास्ता”

तीन-भाषा फॉर्मूला और नई शिक्षा नीति को लेकर केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M. K. Stalin की आलोचना करते हुए उनके बयान को “राजनीतिक कमियों को छिपाने की थकी हुई कोशिश” करार दिया है।

प्रधान ने स्पष्ट किया कि National Education Policy 2020 (NEP 2020) किसी भी तरह से भाषा थोपने की नीति नहीं है, बल्कि यह “भाषाई आजादी” को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि इस नीति का मुख्य उद्देश्य छात्रों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा देकर उनकी सीखने की क्षमता को मजबूत करना है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब स्टालिन ने तीन-भाषा फॉर्मूला को गैर-हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी को बढ़ावा देने का “छिपा हुआ तरीका” बताया। उन्होंने CBSE के करिकुलम फ्रेमवर्क को भी “सोची-समझी रणनीति” करार देते हुए इसे भाषाई थोपने की दिशा में कदम बताया।

इसके जवाब में प्रधान ने कहा कि NEP 2020 सभी भाषाओं को समान महत्व देती है और यह छात्रों को बहुभाषी बनने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे वे वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकें। उन्होंने यह भी कहा कि कई भाषाएं सीखने से किसी क्षेत्रीय भाषा, जैसे तमिल, को नुकसान नहीं बल्कि मजबूती मिलती है।

केंद्रीय मंत्री ने तमिलनाडु सरकार पर शिक्षा से जुड़े अहम प्रोजेक्ट्स में बाधा डालने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आवश्यक समझौतों (MoU) पर हस्ताक्षर न करके PM-SHRI Schools के तहत स्कूलों के निर्माण में देरी की है, जिससे छात्रों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

इसके अलावा, प्रधान ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद राज्य सरकार Jawahar Navodaya Vidyalaya स्थापित करने में भी बाधाएं उत्पन्न कर रही है। उन्होंने इसे “शैक्षिक समानता के खिलाफ” बताते हुए कहा कि इससे गरीब और वंचित छात्रों को मिलने वाले अवसर प्रभावित हो रहे हैं।

प्रधान ने स्टालिन से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय देश में भाषाई विविधता और शिक्षा सुधार को बढ़ावा देने के प्रयासों का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय को राजनीति से ऊपर रखकर छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता देना जरूरी है।

इस मुद्दे पर बढ़ती बयानबाजी से साफ है कि शिक्षा नीति और भाषा का प्रश्न आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति का एक अहम मुद्दा बना रह सकता है।

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VIKAS TRIPATHI
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VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
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