कर्नाटक की राजनीति में सीएम कुर्सी का सस्पेंस थमने का नाम नहीं ले रहा है। सत्तारूढ़ कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की हालिया मुलाकात के बाद भले ही ‘सब कुछ सामान्य’ होने का संदेश दिया गया हो, लेकिन सियासी गलियारों में हलचल अब भी बरकरार है।
इसी बीच कांग्रेस विधायक इकबाल हुसैन ने फिर से बड़ा दावा कर सियासत का तापमान बढ़ा दिया है। रामनगर से विधायक और डीके शिवकुमार के करीबी माने जाने वाले हुसैन ने कहा है कि अगले साल जनवरी की शुरुआत में कर्नाटक को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है—और वो होंगे डीके शिवकुमार।
6 या 9 जनवरी? फिर दोहराया गया दावा
इकबाल हुसैन इससे पहले भी यह कह चुके हैं कि 6 या 9 जनवरी को राज्य में मुख्यमंत्री बदले जाने की संभावना है। अब एक बार फिर उन्होंने अपने उसी दावे को दोहराते हुए कहा, “कुछ लोग ऐसे होते हैं जो बारिश और आपदाओं की सटीक भविष्यवाणी कर लेते हैं। उनसे सुनकर मैंने ये तारीखें बताई हैं। मुझे भगवान पर पूरा भरोसा है।”
कांग्रेस में तेज हुआ सत्ता संघर्ष
दरअसल, कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने 20 नवंबर को अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा सफर पूरा कर लिया है। इसके साथ ही सत्ता परिवर्तन की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया। इन अटकलों को हवा मिली 2023 में सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच हुए कथित ‘सत्ता-साझेदारी समझौते’ से, जिसकी चर्चा समय-समय पर सामने आती रही है।
“200 फीसदी शिवकुमार बनेंगे मुख्यमंत्री”
रामनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान इकबाल हुसैन ने बेहद आत्मविश्वास के साथ कहा,“200 फीसदी डीके शिवकुमार को 6 या 9 जनवरी को सत्ता मिलेगी।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या कांग्रेस आलाकमान की मंजूरी मिल चुकी है, तो उन्होंने पलटकर कहा, “अगर समझौता नहीं हुआ होता, तो हमारे नेता खुद यह बात क्यों कहते? साफ है कि समझौता हुआ है।”
सिद्धारमैया का पलटवार
वहीं दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 19 दिसंबर को विधानसभा में साफ कहा था कि वह पद नहीं छोड़ रहे हैं। उनका दावा है कि कांग्रेस हाईकमान उनके साथ है और अगले ढाई साल तक नेतृत्व बदलने पर कोई फैसला नहीं हुआ है।
इस पर डीके शिवकुमार की प्रतिक्रिया भी कम अहम नहीं रही। उन्होंने कहा कि “मेरे और सिद्धारमैया जी के बीच कांग्रेस हाईकमान की मौजूदगी में एक समझौता हुआ है और हम दोनों उसका पालन करेंगे।”
सवाल वही, जवाब अधूरे
अब सवाल यही है—क्या जनवरी में सचमुच कर्नाटक को नया मुख्यमंत्री मिलेगा या फिर यह सिर्फ सियासी बयानबाज़ी है? फिलहाल कांग्रेस के भीतर चल रही यह खींचतान राज्य की राजनीति को लगातार गर्माए हुए है, और सबकी निगाहें अब जनवरी की उन तारीखों पर टिकी हैं।














