Tuesday, March 3, 2026
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JNU फिर सियासी आग में: खालिद–शरजील के समर्थन में नारे, BJP बोली—‘सांपों के फन कुचले जा रहे हैं’

दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर राजनीतिक विवादों के केंद्र में आ गया है। सोमवार, 5 जनवरी को JNU कैंपस में जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसमें छात्रों ने हाथों में तख्तियां और डफली लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस प्रदर्शन का नेतृत्व जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) और वामपंथी छात्र संगठनों ने किया।

प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ नारे लगाए गए। यह विरोध ऐसे समय पर हुआ है, जब सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगा मामले में पूर्व JNU छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी है।

इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें साबरमती हॉस्टल के बाहर नारेबाजी साफ सुनी जा सकती है। हालांकि, अब तक दिल्ली पुलिस को इस प्रदर्शन को लेकर कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है, लेकिन मामला तूल पकड़ता देख पुलिस द्वारा स्वतः संज्ञान लेने की संभावना जताई जा रही है।

BJP का तीखा हमला

वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने वीडियो साझा करते हुए लिखा कि देशद्रोह के आरोपों में घिरे उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में “अर्बन नक्सलियों” ने JNU में देर रात प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा,
“यह विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारत-विरोधी सोच को बढ़ावा देने की कोशिश है। बौद्धिक आतंकवादी प्रोफेसर, डॉक्टर या इंजीनियर भी हो सकते हैं।”

इसके बाद दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर हमला बोला। उन्होंने लिखा,
“सांपों के फन कुचले जा रहे हैं, सपोले बिलबिला रहे हैं। JNU में नक्सलियों, आतंकियों और दंगाइयों के समर्थन में भद्दे नारे लगाने वाले हताश हैं। नक्सली खत्म किए जा रहे हैं, आतंकी निपटाए जा रहे हैं और दंगाइयों को कोर्ट पहचान चुका है।”

क्यों हुआ प्रदर्शन? दो बड़े कारण

सोमवार को हुए इस विरोध प्रदर्शन के पीछे दो प्रमुख वजहें बताई जा रही हैं—

पहली वजह:
5 जनवरी 2020 को JNU कैंपस में नकाबपोश हमलावरों द्वारा छात्रों और शिक्षकों पर किए गए हमले को छह साल पूरे होना। इस मौके पर JNU शिक्षक संघ (JNUTA) ने इसे “क्रूर हमला” बताते हुए आरोप लगाया कि आज तक हमलावरों की पहचान नहीं हो सकी है। वहीं, JNUSU ने देर रात कैंपस में ‘गुरिल्ला ढाबा’ कार्यक्रम आयोजित किया, जिसे 2020 की हिंसा के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध बताया गया।

दूसरी वजह:
उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई की मांग। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद छात्रों ने फैसले के खिलाफ नारेबाजी की। JNUSU ने इसे न्यायपालिका के दुरुपयोग और छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश करार दिया।

लाइब्रेरी सर्विलांस पर भी बवाल

इन सबके बीच JNU कैंपस में लाइब्रेरी में Facial Recognition सिस्टम और मैग्नेटिक गेट लगाए जाने को लेकर भी विरोध जारी है। इस मुद्दे पर दिल्ली पुलिस ने JNUSU के कुछ पदाधिकारियों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा है, जिसके खिलाफ छात्रों ने सोमवार को अलग से प्रदर्शन किया।

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