Friday, January 16, 2026
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भारत–पाकिस्तान के बीच परमाणु ठिकानों की सूची का आदान-प्रदान, तनावपूर्ण रिश्तों के बीच भरोसे की अहम पहल

भारत और पाकिस्तान ने गुरुवार को एक द्विपक्षीय समझौते के तहत अपने-अपने परमाणु इंस्टॉलेशन और सुविधाओं की सूची एक-दूसरे के साथ साझा की। यह प्रक्रिया उस समझौते के तहत होती है, जो दोनों देशों को एक-दूसरे के परमाणु ठिकानों पर हमला करने से रोकता है। नए साल की शुरुआत में होने वाला यह अभ्यास लगभग तीन दशकों से लगातार जारी है।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद ऑपरेशन सिंदूर के चलते भारत-पाकिस्तान संबंधों में भारी तनाव देखने को मिला है। इसके बावजूद परमाणु ठिकानों की सूची का आदान-प्रदान यह दर्शाता है कि न्यूनतम रणनीतिक भरोसे से जुड़ी व्यवस्थाएं अब भी कायम हैं।

विदेश मंत्रालय का बयान

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया,

“भारत और पाकिस्तान ने आज नई दिल्ली और इस्लामाबाद में एक साथ डिप्लोमैटिक चैनलों के माध्यम से उन परमाणु इंस्टॉलेशन और सुविधाओं की सूची का आदान-प्रदान किया, जो दोनों देशों के बीच परमाणु ठिकानों पर हमले पर रोक लगाने के समझौते के तहत आती हैं।”

इस समझौते पर 31 दिसंबर 1988 को हस्ताक्षर किए गए थे और यह 27 जनवरी 1991 से प्रभाव में आया।

35वीं बार साझा हुई परमाणु ठिकानों की सूची

विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों देशों के बीच यह सूची 35वीं बार साझा की गई है। पहली बार यह आदान-प्रदान 1 जनवरी 1995 को हुआ था। यह प्रक्रिया दोनों देशों के बीच बने न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन और फैसिलिटी पर हमले पर रोक लगाने के समझौते के प्रावधानों के तहत की जाती है।

कैदियों और मछुआरों की सूची भी हुई एक्सचेंज

परमाणु ठिकानों की सूची के साथ-साथ, भारत और पाकिस्तान ने 2008 के द्विपक्षीय समझौते के तहत एक-दूसरे की कस्टडी में मौजूद सिविल कैदियों और मछुआरों की सूची भी एक साथ डिप्लोमैटिक चैनलों के जरिए साझा की।

विदेश मंत्रालय के अनुसार:

भारत ने पाकिस्तान की कस्टडी में मौजूद 391 सिविल कैदियों और 33 मछुआरों की सूची साझा की, जो पाकिस्तानी हैं या जिनके पाकिस्तानी होने का विश्वास है।

वहीं पाकिस्तान ने भारत की कस्टडी में मौजूद 58 सिविल कैदियों और 199 मछुआरों की सूची साझा की, जो भारतीय हैं या जिनके भारतीय होने का विश्वास है।

भारत की रिहाई की मांग

भारत सरकार ने पाकिस्तान से अपील की है कि वह अपनी कस्टडी में मौजूद भारतीय सिविल कैदियों, मछुआरों, उनकी नौकाओं और लापता भारतीय रक्षा कर्मियों को जल्द रिहा कर वापस भेजे।

इसके अलावा, भारत ने 167 भारतीय मछुआरों और सिविल कैदियों की रिहाई और स्वदेश वापसी की प्रक्रिया में तेजी लाने की भी मांग की है, जो अपनी सजा पूरी कर चुके हैं।

पहलगाम हमले के बाद कूटनीतिक संदेश

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में गहरा तनाव देखने को मिला था। इसके जवाब में भारत ने कई कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाए, जिनमें द्विपक्षीय संवाद सीमित करना और सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) में भागीदारी पर रोक जैसे फैसले शामिल थे।

यह कदम भारत के उस लंबे समय से चले आ रहे रुख को दर्शाते हैं कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। इसके बावजूद परमाणु ठिकानों की सूची का आदान-प्रदान यह संकेत देता है कि रणनीतिक स्थिरता और दुर्घटनावश टकराव से बचाव से जुड़े तंत्र अब भी सक्रिय हैं।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
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