Friday, January 23, 2026
Your Dream Technologies
HomeUttar Pradeshचार साल तक अवैध निर्माण कैसे चलता रहा? सर्किल-पांच में अफसरों की...

चार साल तक अवैध निर्माण कैसे चलता रहा? सर्किल-पांच में अफसरों की भूमिका पर सवाल

नोएडा। पूरे सोशल मीडिया पर शिकायतों की बाढ़ है और निशाने पर हैं—नोएडा प्राधिकरण के सर्किल–पांच में तैनात जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार। आरोप बेहद गंभीर हैं, लेकिन सूत्रों का दावा है कि नवीन कुमार की पहुंच ऊपर तक है। यही वजह बताई जा रही है कि वे लंबे समय से एक ही सर्किल में टिके हुए हैं और भूमाफियाओं को खुला संरक्षण मिलता रहा।

यह मामला अब सिर्फ एक अवैध निर्माण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्राधिकरण की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और सत्ता-संरक्षण पर बड़ा सवाल बन चुका है।


सर्किल–पांच: जहां शिकायतें बढ़ती रहीं, कार्रवाई गायब रही

सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार सर्किल–पांच में अवैध निर्माण और कब्जों की शिकायतें वर्षों से की जा रही हैं, लेकिन ज़मीनी कार्रवाई न के बराबर है। आरोप है कि शिकायतों को या तो फाइलों में दबा दिया गया या फिर औपचारिक नोटिस देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।


रिटायरमेंट के बाद भी असर कायम?

अब सवाल सर्किल–पांच के पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक पारसनाथ सोनकर को लेकर भी उठ रहे हैं। भले ही वे रिटायर हो चुके हों, लेकिन सूत्रों का कहना है कि—

रिटायरमेंट के बाद भी विभाग के अंदरखाने कामों में दखल जारी रहा

अपने पुराने निजी और कारोबारी हितों को फायदा पहुंचाने के प्रयास किए गए

यदि यह आरोप सही हैं, तो यह केवल भ्रष्टाचार नहीं बल्कि प्रशासनिक मर्यादाओं का खुला उल्लंघन है।

ये भी पढ़ें: https://pardaphaas.com/zero-tolerance-or-zero-action-serious-corruption-allegations-shake-noida-authority/

मामूरा की सात मंज़िला अवैध इमारत: सिस्टम की नाकामी की तस्वीर

लोकेशन — मामूरा, खसरा नंबर 17, गली नंबर 3।

यहीं एक सात मंज़िला अवैध इमारत प्राधिकरण की आंखों के सामने बनती चली गई। हैरानी की बात यह है कि—

नोटिस जारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

आरोप है कि पी. सोनकर और जेई नवीन कुमार की मिलीभगत के चलते यह अवैध निर्माण चार साल तक निर्बाध रूप से चलता रहा।

 


चार साल, कोई बड़ी कार्रवाई नहीं!

स्थानीय लोगों और सूत्रों का दावा है कि—

बार-बार शिकायतें की गईं

नोटिस दिए गए

लेकिन न तो निर्माण रोका गया, न ही ध्वस्तीकरण हुआ

इसी संरक्षण के चलते यह सात मंज़िला इमारत खड़ी हो गई और नोएडा प्राधिकरण की साख पर सवाल खड़े हो गए।


कब्जे का साम्राज्य और लाखों का किराया

सूत्र बताते हैं कि दिनेश और जितेंद्र ने मामूरा के कई खसरा नंबरों पर कब्जा कर एक बड़ा अवैध साम्राज्य खड़ा कर लिया है। इस साम्राज्य से उन्हें हर महीने लाखों रुपये का किराया मिल रहा है।

सवाल यह है कि—

बिना अफसरों की मिलीभगत यह सब संभव कैसे हुआ?

क्या प्राधिकरण को इन कब्जों की जानकारी नहीं थी?


अब सबसे बड़ा सवाल

कब तक जेई नवीन कुमार इस अवैध इमारत को बचाते रहेंगे?

क्या नए वरिष्ठ प्रबंधक भूमाफियाओं पर कार्रवाई की हिम्मत दिखाएंगे?

क्या इस मामले में कभी जिम्मेदारी तय होगी?

इन सवालों के बीच सबसे अहम मुद्दा यह है कि—

जब इस तरह के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं, दस्तावेज़ों और शिकायतों का अंबार लगा है, फिर भी अगर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो सरकार की “Zero Tolerance” नीति पर सवालिया निशान क्यों न लगाए जाएं?

क्या Zero Tolerance सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित है?
या फिर जमीनी स्तर पर इसका कोई मतलब भी है?

अब निगाहें प्रशासन पर हैं—कि वह इन आरोपों को गंभीरता से लेकर जवाबदेही तय करता है या फिर यह मामला भी बाकी फाइलों की तरह दबा दिया जाएगा।

- Advertisement -
Your Dream Technologies
VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Call Now Button