Friday, March 27, 2026
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होर्मुज जलडमरूमध्य से 4 भारतीय जहाज़ सुरक्षित पार, मिडिल ईस्ट संकट के बीच ऊर्जा और खाद आपूर्ति पर सरकार का बड़ा भरोसा

नई दिल्ली:पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री मार्गों पर बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच भारत ने अपने जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे भारतीय जहाज़ों में से एलपीजी से लदे चार जहाज़ सुरक्षित रूप से पार कर भारत पहुंच चुके हैं, जबकि अन्य जहाज़ों की आवाजाही पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने कहा कि भारत लगातार संबंधित देशों के संपर्क में है ताकि भारतीय जहाज़ों का सुरक्षित ट्रांजिट सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कुल 24 भारतीय जहाज़ होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में मौजूद हैं, जिनमें से चार पहले ही सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं। बाकी जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही के लिए केस-बाय-केस आधार पर समन्वय किया जा रहा है।

ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का संतुलित दृष्टिकोण

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा नीति एक व्यापक और संतुलित दृष्टिकोण पर आधारित है। इसमें तीन प्रमुख कारकों को ध्यान में रखा जाता है—

1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतें

अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति (मार्केट डायनेमिक्स)

वैश्विक हालात (ग्लोबल सिचुएशन)

इन तीनों पहलुओं के आधार पर तेल और गैस की खरीद से जुड़े फैसले लिए जाते हैं। सरकार का कहना है कि ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत कई विकल्पों पर एक साथ काम कर रहा है।

तेल और गैस की खरीद को लेकर विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह एक तकनीकी और व्यावसायिक विषय है और इस पर विस्तृत जानकारी देने का अधिकार Ministry of Petroleum and Natural Gas के पास है।

G7 बैठक में भारत ने उठाए अहम मुद्दे

इसी बीच विदेश मंत्री S. Jaishankar फ्रांस के पेरिस में आयोजित Group of Seven देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए। बैठक में उन्होंने कई वैश्विक मुद्दों पर भारत का दृष्टिकोण रखा।

इस दौरान भारत ने United Nations Security Council में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया और वैश्विक शांति अभियानों को अधिक प्रभावी बनाने की बात कही। इसके अलावा मानवीय सहायता आपूर्ति श्रृंखला (Humanitarian Supply Chains) को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।

विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का ग्लोबल साउथ देशों पर पड़ रहे प्रभाव का मुद्दा भी उठाया। साथ ही भारत ने India-Middle East-Europe Economic Corridor और वैश्विक कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर अपना दृष्टिकोण साझा किया।

खाद आपूर्ति पर सरकार का आश्वासन

पश्चिम एशिया संकट के बीच प्राकृतिक गैस आपूर्ति में संभावित बाधाओं को देखते हुए सरकार ने देश में खाद उत्पादन और आपूर्ति को बनाए रखने के लिए विशेष कदम उठाए हैं।

सरकार ने 9 मार्च 2026 को Natural Gas (Supply Regulation) Order, 2026 लागू किया है, जो Essential Commodities Act के तहत आता है। इसके तहत खाद कारखानों को Priority Sector-II में रखते हुए गैस सप्लाई सुनिश्चित की गई है।

सरकार के अनुसार, शुरुआत में गैस सप्लाई पिछले छह महीनों के औसत का लगभग 65 प्रतिशत सुनिश्चित की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर करीब 80 प्रतिशत तक पहुंचा दिया गया। इसके लिए EPMC प्रक्रिया के माध्यम से लगभग 7.31 MMSCMD अतिरिक्त गैस की व्यवस्था की गई।

खाद उत्पादन और स्टॉक की स्थिति

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1 मार्च से 24 मार्च 2026 के बीच देश में—

13.55 लाख मीट्रिक टन यूरिया

7.62 लाख मीट्रिक टन DAP/NPK

3.06 लाख मीट्रिक टन SSP

का उत्पादन किया गया है।

वहीं 23 मार्च 2026 तक देश में खाद का पर्याप्त भंडार मौजूद है—

यूरिया: 53.08 LMT

DAP: 21.80 LMT

MOP: 7.98 LMT

NPK: 48.38 LMT

सरकार का कहना है कि हर फसल सीजन से पहले राज्यों की जरूरतों का आकलन कर आपूर्ति की योजना बनाई जाती है और उसकी लगातार निगरानी की जाती है।

पाकिस्तान के परमाणु बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान की ओर से भारत पर परमाणु हमले से जुड़े बयानों पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान के परमाणु हथियारों से जुड़े खतरों से पूरी दुनिया वाकिफ है और इस तरह की बयानबाजी गैर-जिम्मेदाराना और चिंताजनक है।

साथ ही मंत्रालय ने 1971 के मुद्दे पर कहा कि Bangladesh Liberation War के दौरान हुए नरसंहार के लिए पाकिस्तानी सेना जिम्मेदार थी और पाकिस्तान अब भी इस तथ्य को स्वीकार करने से बच रहा है।

सरकार की नजर हालात पर

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और समुद्री मार्गों की संवेदनशील स्थिति के बीच भारत सरकार ऊर्जा आपूर्ति, खाद उत्पादन और समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर लगातार निगरानी बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत संबंधित देशों के साथ संपर्क और समन्वय जारी रखे हुए है ताकि देश की आर्थिक और रणनीतिक जरूरतों पर किसी तरह का असर न पड़े।


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