चंडीगढ़, 8 दिसंबर 2025: हरियाणा सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने के लिए राज्य में आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (Essential Services Maintenance Act — ESMA), 1974 के तहत आज से छः महीने के लिए प्रतिबंधित आदेश जारी किया। सरकार ने बताया कि यह आदेश हरियाणा आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम, 1974 (1974 का 40) की धारा 4(क) उप-धारा (1) के अन्तर्गत जारी किया गया है और 8 दिसंबर से प्रभावी होगा।
सरकार के आदेश में कहा गया है कि राज्यपाल ने यह मान्यता दी है कि किसी भी प्रकार की हड़ताल — विशेषकर स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों व कर्मचारियों द्वारा — गंभीर रूप से बीमार मरीजों की देखभाल और आम जनता के लिए आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के प्रवाह को बाधित करेगी। इसलिए आगामी छह महीने तक स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर व कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकेंगे।
यह कदम उन डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बाद उठाया गया है, जिनका आरोप है कि प्रमोशन से जुड़ी मौजूदा नीतियों के कारण उनकी करियर उन्नति सीमित हो रही है। हड़ताल करने वाले चिकित्सकों का कहना था कि कई सहकर्मियों को पूरे करियर में केवल एक ही बार प्रमोशन मिलता है। साथ ही, वे शिकायत कर रहे हैं कि 75 प्रतिशत एसएमओ (Senior Medical Officer) पद पदोन्नति के जरिए भरे जाते हैं जबकि 25 प्रतिशत पद सीधी भर्ती के लिए आरक्षित हैं—जिसके चलते सीधी भर्ती वाले अधिकारी तेज़ी से आगे बढ़ जाते हैं और कभी-कभी महानिदेशक जैसे उच्च पदों तक पहुँच जाते हैं, जबकि सेवारत चिकित्सक मंच पर टिके रहते हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ESMA लागू होने के दौरान किसी भी प्रकार की हड़ताल अवैध मानी जाएगी और आवश्यकतानुसार कार्रवाई की जाएगी ताकि मरीजों की सेवाओं में व्यवधान न आए। वहीं, डॉक्टरों के प्रमोशन व करियर विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर संवाद जारी रखने का आश्वासन भी प्रशासन की ओर से दिया गया है।
अब आगे का फोकस दोनों पक्षों के बीच बातचीत और स्थायी समाधान निकालने पर रहेगा ताकि स्वास्थ्य तंत्र सुचारू रहे और चिकित्सा पेशे के कर्मियों के वैध सरोकारों का समाधान भी हो सके।














