केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर धर्म आधारित आरक्षण को लेकर जोरदार हमला बोला है। मुख्यमंत्री के हालिया बयान और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल दस्तावेजों को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए किशन रेड्डी ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने और सामाजिक न्याय के साथ धोखा देने का आरोप लगाया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति अब विकास से भटककर केवल वोट बैंक और तुष्टीकरण तक सीमित रह गई है। उन्होंने दावा किया कि तेलंगाना की जनता सब देख रही है और आने वाले समय में कांग्रेस तथा मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को इसका करारा जवाब देगी।
‘मुस्लिम लीग कांग्रेस’ वाली राजनीति का आरोप
जी किशन रेड्डी ने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस की नीतियों पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की थी कि इस पार्टी को अपना नाम बदलकर मुस्लिम लीग कांग्रेस कर लेना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि तेलंगाना में भी कांग्रेस उसी सोच के तहत काम कर रही है और राज्य के वास्तविक मुद्दों व विकास से कोई सरोकार नहीं रखती।
‘कांग्रेस का मतलब मुसलमान’ बयान पर निशाना
केंद्रीय मंत्री ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पहले भी कह चुके हैं कि कांग्रेस का मतलब मुसलमान और मुसलमानों का मतलब कांग्रेस है। उन्होंने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट में दस्तावेज दाखिल कर 4 प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण को स्थायी बनाने की घोषणा उसी एजेंडे का हिस्सा है।
किशन रेड्डी ने कहा कि अविभाजित आंध्र प्रदेश में कांग्रेस सरकार द्वारा लागू किया गया 4 प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण हाई कोर्ट द्वारा दो बार असंवैधानिक करार दिया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से स्टे लेकर इसे जारी रखा।
आरक्षण और जाति सर्वेक्षण पर गंभीर सवाल
केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस दोहरी रणनीति पर काम कर रही है—एक ओर धर्म के आधार पर 4 प्रतिशत आरक्षण और दूसरी ओर पिछड़ा वर्ग (BC) श्रेणी में शामिल कर अतिरिक्त 10 प्रतिशत आरक्षण। इस तरह मुख्यमंत्री मुसलमानों के लिए कुल 14 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की कोशिश कर रहे हैं, जो संविधान और सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ है।
जाति सर्वेक्षण पर सवाल उठाते हुए किशन रेड्डी ने कहा कि सर्वे की आड़ में पिछड़ी जातियों की वास्तविक आबादी को कम करके दिखाया गया। उनके मुताबिक, तेलंगाना में पिछड़ी जातियों की वास्तविक संख्या 46 प्रतिशत है, जबकि कांग्रेस ने इसे 56 प्रतिशत बताते हुए 10 प्रतिशत मुसलमानों को पिछड़ा वर्ग सूची में शामिल कर दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय निकायों में पिछड़ा वर्ग और मुसलमानों को मिलाकर 42 प्रतिशत आरक्षण तय किया गया, जिससे वास्तविक पिछड़ा वर्ग कोटा 34 प्रतिशत से घटकर 32 प्रतिशत रह गया। अगर अदालत ने इस पर रोक नहीं लगाई होती, तो पिछड़े वर्गों को भारी नुकसान होता।
GHMC चुनावों का हवाला
ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC) चुनावों का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्ष 2020 में पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित 50 सीटों में से 31 सीटें नॉन-बीसी उम्मीदवारों ने जीत लीं, जिससे वास्तविक पिछड़े वर्गों को उनका अधिकार नहीं मिल पाया।
किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब धर्म आधारित 4 प्रतिशत आरक्षण के साथ-साथ पिछड़ा वर्ग कोटे में 10 प्रतिशत जोड़कर वास्तविक पिछड़े वर्गों के अधिकार छीनने की कोशिश कर रही है।














