लखनऊ की पॉश कॉलोनी स्वस्तिक सिटी (अहिमामऊ, सुल्तानपुर रोड) में सार्वजनिक रास्ते को बंद करने के विवाद ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में जौनपुर से पूर्व सांसद और बाहुबली नेता धनंजय सिंह, जौनपुर के महाराजगंज ब्लॉक प्रमुख विनय सिंह, उनके सरकारी गनर और 8–10 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
यह केस सुशांत गोल्फ सिटी थाने में कॉलोनी निवासी कौशल तिवारी की तहरीर पर दर्ज हुआ है। आरोप है कि 20 फीट चौड़े सार्वजनिक रास्ते को दीवार खड़ी कर बंद करने की कोशिश की गई और विरोध करने पर कॉलोनी वासियों को धमकाया गया।
कई गंभीर धाराओं में केस
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा
191(2), 191(3), 190, 115(2), 352, 351(3), 127(1), 131, 74
के साथ ही SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(द) और 3(1)(ध) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। ये धाराएं धमकी, आपराधिक साजिश, रंगदारी और सामाजिक उत्पीड़न जैसे गंभीर अपराधों से जुड़ी हैं।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
सोमवार को विनय सिंह ने अपने प्लॉट से सटे 20 फीट चौड़े सार्वजनिक रास्ते पर दीवार बनवा दी। कॉलोनी के नक्शे और विनय सिंह की प्लॉट रजिस्ट्री में यह रास्ता सार्वजनिक रूप से दर्ज है, जो कॉलोनी के अन्य निवासियों के लिए मुख्य आवागमन मार्ग है।
जब कॉलोनी वासियों ने इसका विरोध किया तो विवाद बढ़ गया। आरोप है कि विनय सिंह हथियारबंद समर्थकों के साथ पहुंचे और पूर्व सांसद धनंजय सिंह का नाम लेकर दबाव बनाया। स्थिति बिगड़ने पर गुस्साए निवासियों ने दीवार गिरा दी।
पहले उल्टी कार्रवाई, फिर पुलिस कमिश्नर का हस्तक्षेप
घटना के बाद जब कॉलोनी निवासी थाने पहुंचे तो तत्कालीन थानाध्यक्ष उपेंद्र सिंह ने उनकी शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय विनय सिंह की तहरीर पर कॉलोनी वासियों के खिलाफ ही केस दर्ज कर लिया।
मंगलवार को विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद मामला पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र सिंह सेंगर तक पहुंचा। कॉलोनी वासियों ने नक्शा और रजिस्ट्री के दस्तावेज पेश किए। कमिश्नर ने तत्काल संज्ञान लेते हुए थानाध्यक्ष उपेंद्र सिंह को लाइन हाजिर कर दिया और आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए।
धनंजय सिंह का कनेक्शन
बताया जा रहा है कि विनय सिंह, पूर्व सांसद धनंजय सिंह के करीबी हैं। धनंजय सिंह भी इसी कॉलोनी में रहते हैं। उनका नाम पहले भी कई आपराधिक मामलों—अपहरण, रंगदारी और धमकी—में आ चुका है। स्वस्तिक सिटी कॉलोनी पहले भी विवादों को लेकर चर्चा में रही है।
आम लोगों बनाम दबंगों की लड़ाई
इस घटना ने लखनऊ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, थानाध्यक्ष की लाइन हाजिरी से यह संकेत जरूर मिला है कि दबाव में की गई गलत कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश जारी है।
कॉलोनी निवासियों का कहना है कि यह मामला आम नागरिकों और दबंगों के बीच संघर्ष का प्रतीक बन गया है, जहां कानून का साथ मिलने से उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है।














