देश के नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेन्सिव रिविज़न (SIR) का काम चल रहा है, लेकिन सबसे अधिक दहशत और तनाव पश्चिम बंगाल में देखने को मिल रहा है। यहाँ SIR प्रक्रिया में शामिल बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) लगातार आत्महत्या कर रहे हैं। बुधवार को जलपाईगुड़ी में एक और BLO की मौत की खबर सामने आई, जिससे पूरे राज्य में हड़कंप मच गया।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का दावा है कि SIR शुरू होने के बाद से अब तक 28 लोगों ने जान दे दी है। तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव से पहले इस प्रक्रिया के खिलाफ खुले तौर पर मोर्चा खोल दिया है।
BJP–ECI का दावा: लाखों नाम कटेंगे, ‘अवैध’ मतदाता बाहर होंगे
BJP नेता शुभेंदु अधिकारी पहले ही कह चुके हैं कि SIR के बाद बंगाल में एक करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाएंगे और जिनके नाम कटेंगे वे “बांग्लादेशी या रोहिंग्या” होंगे। वहीं चुनाव आयोग ने भी SIR शुरू होने से पहले कहा था कि राज्य में 34 लाख आधार कार्डधारक मतदाता मृत पाए गए हैं, जिनके नाम हटाए जाएंगे।
इन दावों के बाद से राज्य में राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है।
जलपाईगुड़ी में BLO शांति मुनि उरांव की आत्महत्या
बुधवार सुबह मालबाजार के रंगामाटी ग्राम पंचायत में BLO शांति मुनि उरांव (48) का घर के पास पेड़ से लटका शव मिला।वे पेशे से ICDS कार्यकर्ता थीं और बूथ नंबर 101 की BLO के रूप में काम कर रही थीं।
परिवार का आरोप है कि—
“बंगाली भाषा न आने और काम के अत्यधिक दबाव के कारण शांति ने जान दे दी।”
उनके पति सुखू एक्का ने बताया कि पत्नी कई दिनों से तनाव में थीं। वे न तो बंगाली पढ़ पाती थीं और न लिख पाती थीं, जिसके कारण उन्हें हर दिन प्रताड़ना और दबाव का सामना करना पड़ता था।
उन्होंने कहा—“वह सुबह 11 से शाम 7 बजे तक काम करती थीं। कुछ दिन पहले BLO का पद छोड़ने ब्लॉक ऑफिस गई थीं, लेकिन उन्हें इस्तीफ़ा नहीं देने दिया गया।”
उनके बेटे ने भी बताया कि वह बंगाली नहीं जानता, इसलिए मां की मदद नहीं कर पाता था।
“EC को ज़िम्मेदारी लेनी होगी”—TMC विधायक
माल विधानसभा क्षेत्र के विधायक और राज्य के आदिवासी कल्याण मंत्री बुलुचिक बड़ाइक शांति के घर पहुंचे और कहा—“SIR के कारण लोग आत्महत्या कर रहे हैं। इस बार काम के दबाव में एक BLO की मौत हो गई। चुनाव आयोग को इस मौत की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।”
बर्दवान के कालना में भी हाल ही में एक BLO की मौत हो चुकी है।
ममता बनर्जी का आरोप—“दो महीने में तीन साल का काम, यह अमानवीय दबाव”
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने X पर लिखा—“मैं स्तब्ध हूं। SIR में काम करते हुए एक और BLO ने आत्महत्या कर ली। SIR शुरू होने के बाद से 28 लोग मर चुके हैं।”
उन्होंने कहा कि—“जिस काम में तीन साल लगते थे, उसे दो महीने में निपटाने का दबाव राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए डाला जा रहा है।”
ममता ने एक बार फिर इस “अनियोजित और अमानवीय” प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की है।














