Friday, January 16, 2026
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फर्जी आयुष्मान कार्ड रैकेट का भंडाफोड़: गाज़ीपुर समेत 5 जिलों के 7 आरोपी STF की गिरफ्त में

बिग ब्रेकिंग – लखनऊ STF ने फर्जी पहचान (फर्जी ID) के जरिए अपात्र लोगों के आयुष्मान भारत कार्ड बनवाने वाले बड़े गिरोह का खुलासा किया है। इस गिरोह ने अब तक 2 हजार से ज्यादा अपात्रों के आयुष्मान कार्ड बनवाकर उन्हें सरकारी योजना का लाभ दिलाया।

गाज़ीपुर, लखनऊ, बाराबंकी, प्रतापगढ़ और इटावा से जुड़े आरोपी

गिरफ्तार किए गए सात आरोपियों में गाज़ीपुर, लखनऊ, बाराबंकी, प्रतापगढ़ और इटावा के रहने वाले लोग शामिल हैं। STF ने सभी को गोमतीनगर विस्तार इलाके से गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है—

चंद्रभान वर्मा (35), निवासी जलालपुर किठौली, थाना पट्टी, प्रतापगढ़

राजेश मिश्रा (25), निवासी जैदपुर, बाराबंकी

सुजीत कनौजिया (23), निवासी सफदरगंज, बाराबंकी

सौरभ मौर्या (22), निवासी जैदपुर, बाराबंकी

विश्वजीत सिंह (39), निवासी परसपुरा, गाज़ीपुर

रंजीत सिंह, निवासी माल, लखनऊ

अंकित यादव (20), निवासी सैफई, इटावा

पहले भी पकड़े जा चुके हैं गिरोह के सदस्य

इसी गिरोह के दो सदस्य 17 जून 2025 को नवाबगंज, प्रयागराज से गिरफ्तार किए गए थे। उस दौरान 84 अपात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड बरामद हुए थे, जिसके बाद प्रयागराज में मामला दर्ज कराया गया था।

कैसे चलता था फर्जीवाड़े का खेल

STF के अनुसार, लखनऊ और आसपास के इलाकों में यह गिरोह साइबर कैफे संचालकों और ISA (Implementation Support Agency) के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से काम कर रहा था।

गिरोह पात्र परिवारों की फैमिली आईडी में OTP बाइपास कर अपात्र लोगों को जोड़ देता था। इसके बाद ISA और SHA (State Health Agency) स्तर पर सेटिंग के जरिए आयुष्मान कार्ड अप्रूव कराए जाते थे।

मास्टरमाइंड ने खोले राज

गिरोह का मास्टरमाइंड चंद्रभान वर्मा है। पूछताछ में उसने बताया कि वह प्रति कार्ड करीब 6 हजार रुपये लेता था।

फैमिली आईडी में नाम जोड़ने के लिए 2 हजार रुपए

ISA स्तर पर अप्रूवल के लिए 1000 से 1500 रुपए

SHA स्तर पर अप्रूवल के लिए 4500 से 5000 रुपए तक खर्च होते थे

कैंसर इंस्टीट्यूट के आयुष्मान मित्र की मिलीभगत

जांच में सामने आया कि कल्याण सिंह कैंसर इंस्टीट्यूट, लखनऊ में कार्यरत आयुष्मान मित्र रंजीत सिंह भी इस रैकेट में शामिल था। वह अस्पताल के कंप्यूटर ऑपरेटर की मदद से फर्जी कार्डों में जिले का मिसमैच ठीक करता था।

इसके बाद इन्हीं फर्जी कार्डों से अलग-अलग अस्पतालों में मुफ्त इलाज कराकर अवैध कमाई की जाती थी।

20 लाख रुपये से ज्यादा की रिश्वत

चंद्रभान वर्मा ने STF को बताया कि उसने ISA और SHA से जुड़े कर्मचारियों को अब तक करीब 20 लाख रुपये से अधिक कार्ड अप्रूवल के लिए दिए हैं।

गिरोह के अन्य सदस्यों ने भी स्वीकार किया कि अब तक 2000 से ज्यादा फर्जी आयुष्मान कार्ड बनवाए जा चुके हैं।

STF अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य सरकारी और निजी कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

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