प्रवर्तन निदेशालय (ED) की लखनऊ जोनल टीम ने आम्रपाली ग्रुप के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत करीब 99.26 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। आम्रपाली घोटाले में यह अब तक की सबसे अहम और प्रभावशाली कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।
ईडी की जांच में सामने आया है कि आम्रपाली ग्रुप के निदेशक अनिल कुमार शर्मा, शिव प्रिया और अजय कुमार ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर फ्लैट खरीदारों के पैसों का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया। आरोप है कि खरीदारों से करोड़ों रुपये वसूलने के बावजूद उन्हें अब तक फ्लैटों का कब्जा नहीं दिया गया। इसके अलावा, निवेश की गई राशि को परियोजनाओं में लगाने के बजाय अन्य गैरकानूनी कार्यों में इस्तेमाल किया गया।
शेल कंपनियों और फर्जी सप्लायरों के जरिए धन की हेराफेरी
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आम्रपाली ग्रुप ने टीएमटी बार और निर्माण सामग्री की खरीद के नाम पर फर्जी लेन-देन किए। इन लेन-देन के जरिए पैसा शेल कंपनियों और फर्जी सप्लायरों के माध्यम से घुमाया गया, नकद निकासी की गई और अपराध से अर्जित धन को छिपाने की कोशिश की गई।
आम्रपाली ग्रुप के खिलाफ दिल्ली पुलिस, नोएडा पुलिस और EOW दिल्ली में कई मामले दर्ज हैं। इसके बाद 23 जुलाई 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए थे। इन्हीं मामलों के आधार पर ईडी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है।
ED, Lucknow Zonal Office has provisionally attached immovable properties worth Rs. 99.26 Crore under PMLA, 2002 in the case of the Amrapali Group in a matter related to defrauding of homebuyers. The immovable properties attached include the office and factory land & building of… pic.twitter.com/pDMWuB5coc
— ED (@dir_ed) January 3, 2026
किन संपत्तियों को किया गया अटैच
ईडी ने आम्रपाली ग्रुप से जुड़ी मौर्या उद्योग लिमिटेड की संपत्तियों को अटैच किया है, जिनमें कार्यालय, फैक्ट्री की जमीन और भवन शामिल हैं। मौर्या उद्योग लिमिटेड, सुरेका समूह की इकाई है, जिसके प्रवर्तक नवनीत सुरेका और अखिल सुरेका हैं। ईडी के मुताबिक, इन संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत करीब 99.26 करोड़ रुपये है। ये संपत्तियां नोएडा, दिल्ली और गुरुग्राम में स्थित हैं।
ईडी ने बताया कि इस मामले में अब तक कुल 303.08 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं। एजेंसी का मानना है कि इन संपत्तियों का इस्तेमाल अवैध रूप से अर्जित धन को छिपाने और उसे इधर-उधर घुमाने के लिए किया गया।
यह कार्रवाई हजारों पीड़ित फ्लैट खरीदारों के लिए एक बड़ी राहत और न्याय की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।














