नई दिल्ली:प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आबकारी नीति से जुड़े मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवालl को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि केजरीवाल ने जानबूझकर समन का पालन नहीं किया और जांच में सहयोग से बचते रहे।
ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील
ईडी ने ट्रायल कोर्ट के 22 जनवरी के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें केजरीवाल को समन के बावजूद पेश न होने के मामलों में बरी कर दिया गया था। इस अपील पर 2 अप्रैल को न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच सुनवाई करेगी।
ED का आरोप: जानबूझकर नहीं हुए पेश
ईडी का कहना है कि उस समय मुख्यमंत्री रहे केजरीवाल ने एजेंसी द्वारा जारी समन का जानबूझकर जवाब नहीं दिया और जांच में शामिल होने से बचते रहे। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने जांच से बचने के लिए बेबुनियाद आपत्तियां उठाईं।
निचली अदालत ने दिया था क्लीन चिट
हालांकि, निचली अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि ईडी यह साबित करने में विफल रही कि केजरीवाल ने जानबूझकर समन का उल्लंघन किया। इसी आधार पर उन्हें बरी कर दिया गया था।
आबकारी नीति पर भी आरोप
ईडी का आरोप है कि आबकारी नीति तैयार करने में केजरीवाल के संपर्क में रहे अन्य आरोपियों ने अनुचित लाभ उठाया और इसके जरिए आम आदमी पार्टी को रिश्वत मिली। हालांकि, इस नीति को बाद में रद्द कर दिया गया था।
अंतरिम जमानत पर हैं केजरीवाल
वर्तमान में अरविंद केजरीवाल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अंतरिम जमानत पर हैं, जो उन्हें Supreme Court of India द्वारा दी गई है। कोर्ट ने गिरफ्तारी की आवश्यकता से जुड़े सवालों पर विस्तृत विचार के लिए मामला बड़ी पीठ को सौंप दिया है।
CBI की अपील भी लंबित
गौरतलब है कि 27 फरवरी को निचली अदालत ने आबकारी घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में केजरीवाल, Manish Sisodia और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ Central Bureau of Investigation की अपील भी हाईकोर्ट में लंबित है।
अब इस मामले की सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि इससे दिल्ली की राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है।














