नोएडा: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर फर्स्ट वान रिहैब फाउंडेशन और विन्सम स्टेप्स ने इस बार पारंपरिक मंचीय कार्यक्रमों से हटकर एक संवेदनशील और सशक्तिकरण परक पहल पेश की। संस्था की टीम और उनके दिव्यांग बच्चे सेक्टर-के पार्कों में जाकर महिलाओं से सीधे संवाद करते हुए उन्हें स्वयं निर्मित हैंडवॉश उपहार स्वरूप देकर सम्मानित कर रहे थे — यह न सिर्फ सम्मान का कदम था बल्कि समावेशिता और आत्मनिर्भरता का संदेश भी था।
कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्य —
आयोजन का मुख्य उद्देश्य केवल स्त्रियों का अभिवादन करना नहीं था, बल्कि समाज के कमजोर तबकों-विशेषकर दिव्यांग बच्चों—को सक्रिय भूमिका देकर उनके आत्मविश्वास को बढ़ाना और समाज में उनकी भागीदारी को दृश्यमान बनाना भी था। फर्स्ट वान रिहैब फाउंडेशन की टीम ने बच्चों को हैंडवॉश बनाने, पैकेजिंग और वितरण तक की पूरी प्रक्रिया में प्रशिक्षित किया। विन्सम स्टेप्स के साथ मिलकर यह पहल बच्चों के व्यावहारिक प्रशिक्षण और समाजीकरण का अवसर भी बनी।
बच्चों की भागीदारी और हैंडवॉश निर्माण प्रक्रिया —
संस्था ने बताया कि हैंडवॉश विशेष रूप से सहज और सुरक्षित सामग्री से बनाया गया, जिसमें बच्चों ने अपने शिक्षकों और कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन में रिफिलिंग, लेबलिंग और सजावट का कार्य किया। बच्चों ने बोतलों पर स्नेहशील संदेश लिखे और कई स्थानों पर स्वयं जाकर महिलाओं को सौंपा — इससे न केवल बच्चों में जिम्मेदारी का भाव बढ़ा बल्कि प्राप्त करने वालों के चेहरे पर भी मुस्कान लौटी। इस पूरी प्रक्रिया ने बच्चों को छोटी-छोटी सूक्ष्म-मोटर क्षमताओं, टीम वर्क और समाज के साथ संवाद कौशल सिखाने का काम किया।
जागरूकता शिविर और हैंडवॉशिंग डेमोनस्ट्रेशन —
साथ ही आयोजन में उपस्थित टीम ने महिलाओं को हाथ धोने की सही विधि के बारे में भी व्यावहारिक रूप से जागरूक किया — साबुन के साथ कम से कम 20-30 सेकंड तक सभी उंगलियों, हथेलियों और नाखूनों के नीचे पर्याप्त तरह से रगड़ने की आदत, और स्वच्छता के विविध पहलुओं पर संक्षिप्त सूचना दी गई। बुजुर्ग, घर की महिलाएँ और पार्क आने-जाने वाली माताएँ इस सरल लेकिन असरदार संदेश से प्रभावित दिखीं। आयोजकों ने बताया कि सही हाथ स्वच्छता संक्रमणों को रोकने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है, और इसे रोज़मर्रा की जीवनशैली में शामिल करना आवश्यक है।

उपस्थित गणमान्य व्यक्ति और आयोजक वक्तव्य —
कार्यक्रम में विन्सम स्टेप्स की निदेशक पूणम मिश्रा, फिजियोथेरेपिस्ट साक्षी भदोलिया, फर्स्ट वान रिहैब फाउंडेशन के निदेशक डॉ. महिपाल सिंह, डॉ. दीक्षा श्रीवास्तव, मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुश्मिता भाटी, विशेष शिक्षिका एलीका रावत, एडमिन हेड कृष्णा यादव और अभिनव सिंह उपस्थित रहे। आयोजकों ने साझा रूप से कहा कि महिलाओं के प्रति सम्मान प्रकट करने का यह तरीका अनूठा इसलिए भी है क्योंकि इसमें समाज के कमजोर वर्गों को भी सम्मान के समकक्ष अवसर दिए गए। पूनम मिश्रा ने कहा कि बच्चों की यह भागीदारी समाज में समावेशिता का जीवंत उदाहरण है। डॉ. महिपाल सिंह ने बताया कि इस तरह के व्यावहारिक अनुभव बच्चों में आत्मनिर्भरता और सम्मान का भाव पैदा करते हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया और समाजिक अर्थ —
स्थानीय महिलाओं और पारिवारिक सदस्यों ने इस पहल की सराहना की और कहा कि ऐसे कार्यक्रम न केवल महिला-सम्मान बढ़ाते हैं बल्कि समाज में सहयोग और बराबरी का संदेश भी फैलाते हैं। कई महिलाओं ने बच्चों से सीधे बातचीत की और उनके प्रयासों को प्रोत्साहित किया — इससे स्पष्ट होता है कि सामुदायिक जुड़ाव और आपसी सराहना से छोटे-छोटे कदम भी बड़े सामाजिक बदलाव की दिशा में प्रेरित कर सकते हैं।
भविष्य की योजनाएँ और अनुरोध —
आयोजकों ने कहा कि इस पहल को आगे बढ़ाया जाएगा और समुदाय के अधिक हिस्सों तक पहुँचाने की योजना है — जैसे- स्कूलों, स्वास्थ्य शिविरों और स्थानीय मेलों में हाथ से बनी वस्तुओं के माध्यम से दिव्यांग बच्चों की रचनात्मकता और कार्यक्षमता को प्रदर्शित करना। साथ ही उन्होंने नागरिकों और संस्थागत भागीदारों से सहयोग की अपील की ताकि बच्चों के कौशल विकास और पुनर्वास कार्यक्रमों के लिये संसाधन जुटाए जा सकें।
समापन— आभार और प्रेरणा का संदेश
कार्यक्रम का समापन आभार व्यक्त करने और महिलाओं के योगदान को नमन करने के साथ हुआ। आयोजकों ने सभी सहयोगियों, स्वयंसेवकों तथा पार्क में उपस्थित महिलाओं का धन्यवाद किया और इस पहल को एक छोटी-सी प्रेरणा बताते हुए कहा कि समाज की सशक्त महिलाएँ और सशक्त दिव्यांग बच्चे मिलकर ही समग्र विकास की दिशा को तेज कर सकते हैं।














