नयी दिल्ली — देश में हवाई सुरक्षा और नियम-पालन को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच नागरिक उड्डयन नियामक DGCA ने पिछले दो वर्षों (1 जनवरी 2024 — 31 दिसंबर 2025) के दौरान शेड्यूल्ड कमर्शियल एयरलाइंस को कुल 352 “क्यों बताओ” (show-cause) नोटिस जारी किये हैं। यह जानकारी सिविल एविएशन मंत्रालय ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।
मंत्रालय के डेटा के मुताबिक इनमें सबसे अधिक नोटिस इंडिगो (98) और एयर इंडिया (84) को जारी किए गए। अन्य एयरलाइंस को मिले नोटिस इस प्रकार हैं: एयर इंडिया एक्सप्रेस 65, स्पाइसजेट 45, एलायंस एयर 23, अकासा एयर 17, फ्लाई बिग 12, AIX कनेक्ट 7, स्टार एयर 1।
सरकारी उत्तर में यह भी बताया गया कि इन 352 नोटिसों में से 139 मामलों में संबंधित एयरलाइंस पर जुर्माना लगाया गया, जबकि 113 मामलों में DGCA ने चेतावनी जारी की। केवल 7 नोटिसों के संबंध में नियामक ने संतोषजनक जवाब माना। मंत्रालय ने नोटिस-वार एयरलाइन-विशिष्ट कार्रवाई का विस्तृत ब्रेकडाउन साझा नहीं किया।
सुरक्षा-चिंता और नियामक निगरानी
राज्यसभा में लिखित जवाब के हिस्से के रूप में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि DGCA के पास विमानों की संख्या, ऑन-टाइम परफॉर्मेंस (OTP) और रूट रेशनलाइजेशन जैसे पहलुओं की निगरानी के लिए एक तंत्र मौजूद है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि एयरलाइंस ने एंट्री/विनिर्माण के रूप में — 31 जनवरी तक कुल 8 विमान (1 वाइड-बॉडी और 7 नैरो-बॉडी) शामिल किए हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर जारी किए गए “क्यों बताओ” नोटिस नियमों के अनुपालन में व्यवस्थित कमियों और शिथिल निगरानी को दर्शाते हैं। हालांकि नोटिस देना और चेतावनी जारी करना नियामक का कदम है, आलोचक कहते हैं कि दुर्घटना-रुझान और सुनिश्चित जवाबदेही के लिए पारदर्शिता और कड़े दंड आवश्यक हैं।
हवाई किराए पर सवाल — MP ने उठाए कुल मिलाकर मुद्दे
सुरक्षा के साथ-साथ बढ़ती एयर किरायों ने भी राजनीतिक चर्चा छेड़ी है। राज्यसभा सांसद बेडा मस्तान राव यादव ने केंद्र से हवाई टिकटों में बढ़ोतरी पर सफाई मांगी और बताया कि विशेषकर पीक-सीज़न में किराये में हुई भारी बढ़ोतरी यात्रियों के लिए चिंताजनक है। सांसद ने एयरलाइन-परिवहन के खर्चों पर एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की ऊँची कीमतों के प्रभाव पर भी ध्यान दिलाया।
क्या मायने रखता है — निष्कर्ष और आगे क्या होना चाहिए
1.नियम-पालन पर कड़ा निरीक्षण: 352 नोटिस यह संकेत देते हैं कि एयरलाइंस के संचालन-मानक, मेंटेनेंस या प्रक्रियात्मक अनुपालन में कमी रही है — DGCA को इन मामलों का ट्रेंड-विश्लेषण कर लक्षित निरीक्षण और सुधार लागू करना होगा।
2.पारदर्शिता और सार्वजनिक रिपोर्टिंग: जनता का विश्वास बहाल करने के लिए नोटिसों और उस पर हुई कार्रवाई का अधिक विस्तृत और समयबद्ध सार्वजनिक प्रकाशन आवश्यक होगा।
3.सख्त दंड और सुधार-योजना: केवल चेतावनी पर्याप्त नहीं; बार-बार उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कदम और सुधार के ठोस रोडमैप ज़रूरी हैं।
4.किराये और ATF पर नीति विमर्श: एयर किराए के उछाल को नियंत्रित करने के लिए ईंधन लागत, प्रतिस्पर्धा और नियामक पहलुओं का समेकित मूल्यांकन चाहिए — जहाँ आवश्यक हो, सब्सिडी/टैक्स संरचना पर समीक्षा हो सकती है।
राज्यसभा के दिए गए इस डेटा ने एक बार फिर हवाई क्षेत्र में नियम-पालन और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर सवाल उठा दिये हैं। न केवल यात्रियों की सुरक्षा, बल्कि एयरलाइनों की जवाबदेही और लागत-प्रभावकता पर भी नीति-निर्माताओं और नियामक को तत्पर होकर काम करना होगा।














