सिरसा / रोहतक: डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को रोहतक की सुनारिया जेल से 40 दिन की पैरोल पर रिहा किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार उन्हें आज दोपहर 12 बजे जेल से बाहर निकाला जाएगा और पैरोल अवधि के दौरान वे अपने डेरा मुख्यालय सिरसा में ठहरेंगे।
राम रहीम विभिन्न मामलों में सुनाई गई सज़ाओं का सामना कर रहे हैं। अगस्त 2017 में रेप के दो मामलों में दोषी करार दिए जाने के बाद पंचकूला की अदालत ने उन्हें 20 साल कैद के साथ हर पीड़िता को 15 लाख रुपये जुर्माने का आदेश दिया था। इसके अलावा उन पर लगे अन्य मामलों और आपराधिक प्रक्रियाओं के भी समीप-नजदीक प्रभाव रहे हैं। 2017 की सज़ा के बाद डेरा समर्थकों और सुरक्षाबलों के बीच हुई झड़पों में दर्जनों लोग मरे थे, जिसके बाद उन्हें सुरक्षा कारणों से पंचकूला से एयरलिफ्ट कर रोहतक की जेल में रखा गया था।
पैरोल व उसके नियम
सूत्रों के अनुसार इस पैरोल के दौरान राम रहीम को डेरा के अंदर अपने अनुयायियों को इकट्ठा करने की अनुमति नहीं है; वह वर्चुअल माध्यम से अपने अनुयायियों से संचार कर सकते हैं। इसी के पहले सिरसा पहुंचते ही उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर अनुयायियों से डेरा अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने का आह्वान भी किया था।
पैरोल का इतिहास — यह 15वाँ अवसर
गुरमीत राम रहीम इस बार जेल से बाहर आने का 15वाँ मौका है। पिछले पैरोल के कुछ प्रमुख तिथियाँ इस प्रकार हैं:
24 अक्टूबर, 2020 — 1 दिन की पैरोल
21 मई, 2021 — 12 घंटे (बीमार मां से मिलने के लिए)
7 फरवरी, 2022 — 21 दिन
जून, 2022 — 30 दिन
14 अक्टूबर, 2022 — 40 दिन
21 जनवरी, 2023 — 40 दिन
20 जुलाई, 2023 — 30 दिन
21 नवंबर, 2023 — 21 दिन
19 जनवरी, 2024 — 50 दिन
13 अगस्त, 2024 — 21 दिन
2 अक्टूबर, 2024 — 20 दिन
28 जनवरी, 2025 — 30 दिन
9 अप्रैल, 2025 — 21 दिन
5 अगस्त, 2025 — 40 दिन
(उपरोक्त तिथियाँ और अवधि स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार संकलित की गई हैं।)
पिछला समय—हिंसक घटनाक्रम और प्रभाव
अदालत के फैसले के तुरंत बाद—2017 के बाद—राम रहीम के समर्थकों और सुरक्षा बलों के बीच हुई टकराहट में पंचकूला और सिरसा में बड़ी हिंसा हुई थी, जिसमें आधिकारिक और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कई लोगों की जान गई थी। उस घटनाक्रम के बाद से ही राम रहीम की रिहाई और पैरोल को लेकर संवेदनशीलता बरती जाती है और सुरक्षा व सार्वजनिक व्यवस्था के व्यापक इंतज़ाम किए जाते हैं।
अधिकारिक स्थिति और आगे की प्रक्रिया
पैरोल के आदेश संबंधित अधिकारियों द्वारा निर्गत किए गए हैं और पैरोल के नियमों का उल्लंघन होने पर वे जेल लौटाए जा सकते हैं। न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर लंबित अन्य मुकदमों व कानूनी प्रक्रियाओं पर यह पैरोल कोई अंतिम फैसला नहीं प्रभावित करता।














