Friday, January 16, 2026
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दिल्ली हाईकोर्ट ने वेब-सीरीज़ ‘यूपी 77’ के रिलीज़ पर दायर याचिका पर नोटिस जारी किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार (23 दिसंबर) विक्रम (विकास) दुबे के जीवन पर आधारित बताई जा रही वेब-सीरीज़ ‘यूपी 77’ की 25 दिसंबर की रिलीज़ को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और सीरीज़ के निर्माताओं से जवाब मांगा है। याचिका अभिनेता-निर्माताओं के खिलाफ नहीं, बल्कि इस सीरीज़ के अनधिकृत और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े चित्रण के विरोध में दुबे की पत्नी ऋचा दुबे ने दाखिल की है।

याचिका में क्या कहा गया है — संक्षेप
याचिकाकर्ता का कहना है कि सीरीज़ में विकास दुबे और उनके परिवार के निजी व वैवाहिक जीवन को बिना अनुमति और संवेदनशीलता के दिखाया जा रहा है, जिससे परिवार की निजता, गरिमा और सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचने की संभावना है। याचिका में तर्क रखा गया है कि ऐसे आपराधिक किस्सों को मनोरंजन का साधन बनाना समाज पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है और दुबे के बच्चों पर भावनात्मक व सामाजिक प्रतिकूल परिणाम होंगे। याचिका में निर्माताओं से रिलीज़ पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है।

कोर्ट ने क्या कहा और अगला कदम
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म और निर्माताओं को नोटिस जारी करते हुए उनके जवाब तलब किए और कहा कि सभी दलीलों को सुनने के बाद ही आगे का फ़ैसला होगा। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई बुधवार (24 दिसंबर) के लिए निर्धारित की है।

पृष्ठभूमि — विकास दुबे का मामला
विकास दुबे को जुलाई 2020 में कानपुर ले जाते समय कथित रूप से पुलिस मुठभेड़ में मार दिया गया था। पुलिस के अनुसार वह उज्जैन से कानपुर लाए जा रहे थे जब वाहन पलटा और भागने का प्रयास करने पर गोलीबारी हुई; इस घटना को लेकर तब कई सवाल और राजनीतिक-कानूनी बहसें उभरीं। बाद में गठित जाँच आयोग ने कुछ निष्कर्ष दिए थे, पर विवाद और सार्वजनिक संवेदनशीलता बनी रही।

कानूनी मुद्दे और संवेदनशीलता
कानूनी दृष्टि से यह मामला निजता, मानहानि और संवैधानिक अधिकारों के टकराव का रूप ले सकता है — एक ओर अभिव्यक्ति-स्वतंत्रता और फिल्म-निर्माण की स्वतंत्रता, दूसरी ओर व्यक्ति और उसके परिवार की निजता-दंगल। अदालत यह तय करेगी कि क्या सार्वजनिक हित व जनचरित्र पर आधारित रचनात्मक अभिव्यक्ति के नाम पर परिवार की संवेदनशीलताओं की अनदेखी की जा रही है या नहीं।

क्या देखने को मिल सकता है आगे?
यदि अदालत को तुरंत रोक लगाने की मांग स्वीकार हुई तो रिलीज़ स्थगित हो सकती है; अन्यथा, निर्माताओं को अपने तर्क—जैसे संज्ञेय रचनात्मक आज़ादी और जनता के प्रती रुचि—प्रस्तुत करने का मौका मिलेगा। हाईकोर्ट के नोटिस के जवाब और बहसें तय करेंगी कि रिलीज़ पर अंतरिम रोक लगेगी या नहीं।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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