कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तारीफ ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। यह वही दिग्विजय सिंह हैं जो वर्षों तक संघ के सबसे मुखर आलोचकों में गिने जाते रहे हैं। उनके इस बयान ने न सिर्फ राजनीतिक विरोधियों को चौंकाया, बल्कि कांग्रेस के भीतर भी असहजता पैदा कर दी।
हालांकि बाद में दिग्विजय सिंह ने अपने बयान को लेकर सफाई दी, लेकिन वह सफाई पार्टी के भीतर उठे सवालों को पूरी तरह शांत नहीं कर पाई। यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस के किसी नेता ने RSS के कामकाज या विचारधारा की खुले तौर पर सराहना की हो।
राहुल गांधी की चेतावनी: डरपोकों को नहीं चाहिए कांग्रेस
कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस सच्चाई से वाकिफ हैं कि पार्टी के भीतर कुछ ऐसे नेता मौजूद हैं जो वैचारिक रूप से संघ के प्रति नरम रुख रखते हैं। इसी संदर्भ में राहुल गांधी पहले ही सख्त संदेश दे चुके हैं।
राहुल ने कहा था—“जो लोग डरते हैं, वे कांग्रेस छोड़कर RSS में जा सकते हैं। हमें निडर लोग चाहिए। जो डरे हुए हैं, वे हमारे किसी काम के नहीं हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी को उन लोगों को वापस लाना चाहिए जो डरते नहीं हैं लेकिन कांग्रेस से बाहर हो चुके हैं, जबकि भीतर बैठे डरपोक नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए।
यह बयान सीधे-सीधे उन नेताओं के लिए था जो कांग्रेस में रहकर भी संघ के प्रति सहानुभूति रखते हैं।
जब कांग्रेस नेताओं ने खुले मंच से RSS की तारीफ की
ओडिशा से उठी आवाज़
इस साल की शुरुआत में ओडिशा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष किशोर पटेल ने RSS की खुले तौर पर सराहना कर सबको हैरान कर दिया। पटेल ने कहा कि RSS पिछले लगभग 100 वर्षों से हिंदुत्व की रक्षा, चरित्र निर्माण और समाज सेवा के क्षेत्र में लगातार काम कर रहा है।
उन्होंने संघ के कार्यकर्ताओं के अनुशासन, समर्पण और देशभक्ति को “तारीफ के काबिल” बताया और कहा कि हिंदुत्व के संरक्षण के लिए जो भी आवश्यक है, वह RSS के माध्यम से किया जा रहा है।
‘कांग्रेसी हूं, लेकिन संघ से जुड़ा हूं’
मध्य प्रदेश के सुसनेर से कांग्रेस विधायक भैरो सिंह परिहार ने भी एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा—“मैं कांग्रेस में हूं, लेकिन मेरा संबंध RSS से रहा है। मैंने संघ के लिए काम किया है।”
यह बयान इसलिए भी अहम था क्योंकि भैरो सिंह पहली बार विधायक बने हैं और उन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार विक्रम सिंह राणा को हराया था।
कांग्रेस सत्र के बाद संघ की तारीफ
नवंबर 2012 में हरियाणा के सूरजकुंड में हुए कांग्रेस सत्र के ठीक अगले दिन, पार्टी के लिए असहज स्थिति तब बनी जब मध्य प्रदेश के देवास से सांसद रहे सज्जन सिंह वर्मा ने RSS की प्रशंसा कर दी।
वर्मा ने कहा था कि “RSS के कार्यकर्ता ज़मीन पर मेहनत करते हैं, जबकि कांग्रेस के नेता AC कमरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं होते।”
उन्होंने यह भी कहा कि RSS अपने मिशन को लेकर स्पष्ट है और उसे पता है कि चुनाव कैसे जीतने हैं।
‘संघ से अनुशासन सीखे कांग्रेस’
मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेता दीपक बाबरिया भी संघ के अनुशासन की मिसाल दे चुके हैं। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से कहा था कि RSS से संगठनात्मक अनुशासन सीखना चाहिए।
विधानसभा में गूंजा RSS का गीत
कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार उस वक्त विवादों में आ गए जब उन्होंने विधानसभा में RSS का गीत गुनगुनाया। बाद में उन्होंने सफाई दी कि उनका उद्देश्य संघ की तारीफ करना नहीं था, बल्कि विरोधियों को समझना था।
इसके बाद कांग्रेस विधायक एच.डी. रंगनाथ ने भी “नमस्ते सदा वत्सले” गीत की शुरुआती पंक्तियों की सराहना करते हुए कहा कि अच्छी बातों को अपनाने में कोई बुराई नहीं है।
बड़ा सवाल: कांग्रेस की वैचारिक दिशा?
इन तमाम घटनाओं ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—
क्या कांग्रेस के भीतर RSS को लेकर वैचारिक भ्रम बढ़ रहा है?
या फिर यह संकेत है कि ज़मीनी राजनीति में संघ की संगठनात्मक ताकत को नज़रअंदाज़ करना अब कांग्रेस नेताओं के लिए मुश्किल होता जा रहा है?
फिलहाल इतना तय है कि दिग्विजय सिंह का बयान कोई अकेली चूक नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर चल रही उस खामोश बहस का हिस्सा है, जो बार-बार सतह पर आ जाती है।














