अरुणाचल प्रदेश के सुदूर पूर्वी अंजॉ जिले में चीन सीमा के बेहद नजदीक लोहित नदी पर प्रस्तावित 1,200 मेगावाट की कलई-II जलविद्युत परियोजना को केंद्र सरकार से पर्यावरणीय मंजूरी मिल गई है। यह परियोजना न केवल पूर्वोत्तर भारत की ऊर्जा जरूरतों को मजबूती देगी, बल्कि रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी बेहद अहम मानी जा रही है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 14,176 करोड़ रुपये की लागत आएगी और इसके लिए करीब 869 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग किया जाएगा। कलई-II एक रन-ऑफ-रिवर परियोजना है, जिसमें बड़े जलाशयों का निर्माण नहीं किया जाता, बल्कि नदी के प्राकृतिक प्रवाह से बिजली उत्पादन किया जाता है। इसी वजह से इसे पर्यावरणीय दृष्टि से अपेक्षाकृत कम नुकसानदेह माना जा रहा है।
रणनीतिक नजरिए से क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना
लोहित नदी का उद्गम पूर्वी तिब्बत की तिराप-फासी पर्वत श्रृंखलाओं से होता है और यह अरुणाचल प्रदेश के किबिथू क्षेत्र से भारत में प्रवेश करती है। चीन सीमा के समीप इस नदी पर जलविद्युत परियोजना स्थापित होने से भारत को नदी के बहाव पर बेहतर निगरानी और नियंत्रण मिलेगा। भविष्य में यह परियोजना जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और सीमा सुरक्षा के लिहाज से भी अहम भूमिका निभा सकती है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह की बड़ी बुनियादी परियोजनाएं न केवल भौगोलिक उपस्थिति को मजबूत करती हैं, बल्कि किसी भी आपात स्थिति में लॉजिस्टिक सपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता को भी बढ़ाती हैं।
स्थानीय विकास और सुरक्षा को मिलेगा बल
कलई-II परियोजना के निर्माण में लगभग 78 महीने का समय लगेगा। इस दौरान क्षेत्र में सड़कों, पुलों, आवासीय परिसरों और अन्य बुनियादी ढांचों का बड़े पैमाने पर विकास होगा। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और जीवन स्तर में सुधार आएगा।
इसके अलावा, परियोजना क्षेत्र में दो स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना की जाएगी, जहां पर्याप्त मेडिकल स्टाफ की तैनाती होगी, जिससे दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होंगी।
पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण पर जोर
पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, परियोजना स्थल के 10 किलोमीटर के दायरे में कोई राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, टाइगर रिजर्व या हाथी कॉरिडोर मौजूद नहीं है। इसके बावजूद वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए 1 करोड़ रुपये की विशेष योजना प्रस्तावित की गई है, जिसमें आवास संरक्षण और एंटी-पोचिंग उपाय शामिल होंगे।
पूर्वोत्तर की ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती
इस परियोजना को THDC इंडिया लिमिटेड द्वारा विकसित किया जाएगा। इससे पूर्वोत्तर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को उल्लेखनीय मजबूती मिलेगी। गौरतलब है कि वर्ष 2023 में केंद्र सरकार और अरुणाचल प्रदेश सरकार ने राज्य की 12 रुकी हुई जलविद्युत परियोजनाओं को पुनः शुरू करने का निर्णय लिया था। कलई-II परियोजना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
लोहित नदी पर बनने वाला यह बांध ऊर्जा उत्पादन, क्षेत्रीय विकास और रणनीतिक सुरक्षा—तीनों मोर्चों पर भारत की स्थिति को मजबूत करेगा, खासकर ऐसे समय में जब सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है।














