गाजीपुर – प्रदेश सरकार के हालिया बजट को लेकर राजनीतिक और शैक्षिक हलकों में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। पीजी कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय ने बजट को जिले की शैक्षिक प्रतिभा और स्वाभिमान पर सीधा प्रहार बताया है। उन्होंने कहा कि गाजीपुर उच्च शिक्षा ग्रहण करने के मामले में प्रदेश में अग्रणी जिलों में शामिल है और यहाँ 350 से अधिक महाविद्यालय संचालित हैं, इसके बावजूद जिले को अब तक अपना राज्य विश्वविद्यालय नहीं मिलना सरकार के “सौतेले व्यवहार” को दर्शाता है।
दीपक उपाध्याय ने आरोप लगाया कि सरकार ने बजट में शिक्षा के क्षेत्र में गाजीपुर की अनदेखी की है। उनका कहना है कि कम शैक्षिक ढांचे वाले जिलों में विश्वविद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं, जबकि गाजीपुर जैसे शिक्षा केंद्र को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने इसे जिले के छात्रों के साथ अन्याय और विश्वासघात बताया। उनके अनुसार हजारों छात्र उच्च शिक्षा और डिग्री के लिए दूसरे जिलों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं, जिससे आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयाँ बढ़ती हैं।
उन्होंने सरकार से मांग की कि गाजीपुर को जल्द राज्य विश्वविद्यालय की सौगात दी जाए, ताकि जिले के छात्रों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा मिल सके। चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि यदि जिले के शैक्षिक अधिकारों की अनदेखी जारी रही, तो छात्र समुदाय आंदोलन के लिए बाध्य होगा। उनका कहना है कि गाजीपुर की धरती ने हमेशा नेतृत्व और प्रतिभा को जन्म दिया है, इसलिए जिले के साथ हो रहे इस कथित भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है।














