महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं और राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। देश की सबसे अमीर नगर निगम बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में इस बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। 227 सीटों वाली बीएमसी में बीजेपी अपने दम पर 96 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है, जबकि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना (शिंदे गुट) ने 30 सीटों पर कब्जा जमाया है। इस तरह बीएमसी की सत्ता पर कई दशकों बाद महायुति का कब्जा तय माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रतिक्रिया
बीएमसी समेत अन्य नगर निगमों में मिली बड़ी सफलता पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और विकास के विजन की जीत बताया।
सीएम फडणवीस ने कहा—
“बीएमसी चुनाव में महायुति को पूर्ण बहुमत मिल रहा है। इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम और काम का स्पष्ट असर दिखाई दिया है। जनता ने विकास के एजेंडे पर भरोसा जताया है। यह पीएम मोदी के विजन की जीत है।”
उन्होंने आगे कहा कि महाराष्ट्र की जनता को मोदी जी पर भरोसा था और बाला साहेब ठाकरे का आशीर्वाद भी महायुति को मिला है। लोगों को अब सिर्फ और सिर्फ विकास चाहिए, राजनीति नहीं।
ठाकरे बंधुओं का गढ़ रहा है बीएमसी
बीएमसी को लंबे समय से शिवसेना (ठाकरे गुट) का अभेद्य किला माना जाता रहा है। लेकिन इस बार के नतीजों और रुझानों से साफ है कि ठाकरे बंधुओं का कई दशक पुराना राजनीतिक गढ़ ढहता नजर आ रहा है।
227 सीटों में से शिवसेना (उद्धव गुट) और मनसे मिलकर भी 100 सीटों का आंकड़ा पार नहीं कर पाईं, जबकि बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना ने मिलकर स्पष्ट बढ़त बना ली है।
बीजेपी को बड़ी राजनीतिक बढ़त
अब तक के आंकड़ों के मुताबिक:
बीजेपी: 96 सीटें
शिंदे गुट की शिवसेना: 30 सीटें
इन नतीजों के साथ बीएमसी पर महायुति का नियंत्रण लगभग तय हो गया है। बीजेपी के लिए यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि विधानसभा चुनाव के बाद अब उसने नगर निगम स्तर पर भी ठाकरे वर्चस्व को करारा झटका दिया है।
मनसे और ठाकरे गुट को झटका
चुनाव से पहले ठाकरे गुट की ओर से कई गंभीर आरोप लगाए गए थे, लेकिन नतीजों में वे बेअसर साबित हुए। उद्धव ठाकरे की स्थिति मजबूत करने के लिए मनसे प्रमुख राज ठाकरे भी उनके साथ आए थे, लेकिन इसके बावजूद मनसे का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। इससे साफ हो गया कि गठजोड़ भी मतदाताओं का भरोसा नहीं जीत सका।
बीएमसी चुनाव के नतीजे यह संकेत दे रहे हैं कि मुंबई की राजनीति में नई शक्ति संरचना उभर रही है। महायुति की यह जीत न सिर्फ स्थानीय राजनीति को प्रभावित करेगी, बल्कि आने वाले चुनावों में भी इसके दूरगामी राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।














