राम नगरी अयोध्या एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल विनय कटियार ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अयोध्या सीट से उतरने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। उनकी इस संभावित वापसी से न केवल भाजपा के भीतर हलचल तेज हुई है, बल्कि प्रदेश की सियासत में भी नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।
हाल ही में अयोध्या स्थित अपने आवास पर कार्यकर्ताओं के साथ लंबी बंद कमरे की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कटियार ने कहा,
“किसने कह दिया कि हमारी कोई तैयारी नहीं है? चुनाव की पूरी तैयारी चल रही है। सही समय पर मैदान-ए-जंग में उतरेंगे।”
उन्होंने अयोध्या को अपनी ‘कर्मभूमि’ बताते हुए कहा कि चुनावी बिगुल यहीं से फूंका जाएगा।
कुर्मी समाज से आने वाले विनय कटियार तीन बार फैजाबाद (अब अयोध्या) लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं और दो बार राज्यसभा सदस्य भी रहे हैं। उनका नाम अयोध्या से अलग करके नहीं देखा जा सकता। राम जन्मभूमि आंदोलन के शुरुआती दौर में वे उन नेताओं में रहे, जिन्होंने इस आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाया। वर्ष 1984 में बजरंग दल की स्थापना कर उन्होंने राम मंदिर आंदोलन को संगठित और धारदार रूप दिया।
राम मंदिर आंदोलन के स्वर्णिम काल में कटियार एक फायरब्रांड नेता के रूप में उभरे। युवाओं को जोड़ने और आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में उनकी भूमिका अहम रही। आज जब अयोध्या में भव्य राम मंदिर आकार ले चुका है, तब कटियार की संभावित राजनीतिक वापसी को राम मंदिर की विरासत को सियासी मजबूती देने के तौर पर देखा जा रहा है।
भाजपा के भीतर यह माना जा रहा है कि कटियार की सक्रिय राजनीति में वापसी से पार्टी का हिंदुत्व आधार और मजबूत होगा, खासकर राम भक्तों और कुर्मी समाज के बीच। विपक्ष के लिए यह चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि अयोध्या सीट अब केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि आस्था और राजनीति का बड़ा प्रतीक बन चुकी है।
कटियार के इस संकेत के बाद यह साफ हो गया है कि 2027 का विधानसभा चुनाव अयोध्या केंद्रित हो सकता है। भले ही टिकट को लेकर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा, लेकिन इतना तय है कि राम नगरी की राजनीति में विनय कटियार का नाम एक बार फिर जोर-शोर से गूंजने वाला है।














